पाकिस्तान में हिंदू लड़की का अपहरण कर करवाया धर्म परिवर्तन, फिर जबरन निकाह करने का आरोप

सिंध में एक नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण, धर्म परिवर्तन और शादी के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. इस मामले को लेकर संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है और कई सवाल उठाए हैं.

Shraddha Mishra

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से सामने आई एक घटना ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक नाबालिग हिंदू लड़की के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के मामले ने मानवाधिकार संगठनों और समाज के कई वर्गों को चिंता में डाल दिया है. इस घटना को लेकर ‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताया है.

संगठन के अनुसार, पूजा नाम की एक छात्रा, जो 9वीं कक्षा में पढ़ती है और रामसुन ठाकुर की बेटी है, को कथित तौर पर जबरन अगवा किया गया. आरोप है कि उसके बाद उस पर दबाव डालकर उसका धर्म परिवर्तन कराया गया. बताया जा रहा है कि धर्म परिवर्तन के बाद उसका नाम बदलकर ‘दुआ फातिमा’ रखा गया और उसकी शादी इमरान अली नाम के व्यक्ति से कर दी गई. इस पूरी प्रक्रिया को संगठन ने बेहद अमानवीय बताया है और कहा है कि इससे लड़की की पहचान और उसकी इच्छा दोनों को नजरअंदाज किया गया.

परिवार और संगठनों में बढ़ती चिंता

इस घटना के बाद लड़की के परिवार की स्थिति बेहद दुखद बताई जा रही है. उनकी पीड़ा सोशल मीडिया और विभिन्न अल्पसंख्यक संगठनों के जरिए सामने आ रही है. इससे सिंध में रहने वाले हिंदू समुदाय के बीच डर और असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है. संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाएं अब कोई नई बात नहीं रह गई हैं, बल्कि खासकर सिंध क्षेत्र में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है. यहां कई परिवार अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता में रहते हैं.

न्याय प्रक्रिया पर उठे सवाल

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर अलग-अलग दावे सामने आते हैं, जिससे सच्चाई तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. कई बार अदालत में लड़की के “स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन” करने की बात कही जाती है, जबकि परिवार अपहरण और दबाव का आरोप लगाता है. इस तरह के विरोधाभासी बयानों के कारण न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पीड़ित पक्ष को सही तरीके से न्याय मिल पाना कठिन हो जाता है.

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में पुलिस या अदालत की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. आमतौर पर ऐसे मामलों में लड़की की उम्र और उसकी सहमति की जांच की जाती है, लेकिन संगठन का कहना है कि वास्तविक परिस्थितियां अक्सर पीड़ित परिवार के खिलाफ जाती हैं.

मानवाधिकार संगठनों की मांग

मानवाधिकार से जुड़े संगठनों ने इस घटना को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सिंध में अपहरण, बाल विवाह और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं.संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए. साथ ही, अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर लड़कियों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

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