3000 रुपये की लालच में दिया आतंकियों का साथ... ये 2 लोग बचा सकते थे पहलगाम हमले में मारे गए बेगुनाहों की जान
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में सामने आया है कि दो स्थानीय लोगों की चुप्पी और लालच ने हालात और बिगाड़ दिए. अगर समय रहते सूचना दी जाती, तो इस घटना का अंजाम शायद कुछ और होता.

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला देश को हिला देने वाला था. इस हमले में 26 बेगुनाह लोगों को उनके परिवारों के सामने गोली मार दी गई थी. अब जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे इस घटना को और भी दर्दनाक बना देती हैं. खुलासा हुआ है कि अगर दो स्थानीय लोगों ने समय रहते पुलिस को सूचना दे दी होती, तो इस बड़े हमले को रोका जा सकता था.
जांच एजेंसियों ने इस मामले में दो स्थानीय लोगों- परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में सामने आया कि इन दोनों ने केवल 3000 रुपये के लालच में तीन विदेशी आतंकियों को अपने घर में ठहराया था. हमले से एक दिन पहले, यानी 21 अप्रैल की रात को ये तीनों आतंकी उनके घर पहुंचे थे. वे करीब पांच घंटे तक वहीं रुके, खाना खाया और आराम किया.
इस दौरान दोनों आरोपियों को यह भी समझ आ गया था कि ये लोग सामान्य नहीं हैं, क्योंकि वे अलग तरह की भाषा बोल रहे थे और उनके पास आधुनिक हथियार थे. बातचीत के दौरान आतंकियों ने ‘अली भाई’ नाम के व्यक्ति का जिक्र किया, जो बाद में लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन टीआरएफ का प्रमुख कमांडर साजिद जट्ट निकला. इसके बावजूद परवेज और बशीर ने इस जानकारी को किसी के साथ साझा नहीं किया.
संदिग्ध गतिविधियां, फिर भी नहीं दी सूचना
रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 10:30 बजे आतंकी वहां से निकल गए. जाते समय उन्होंने अपने साथ खाना पैक किया और कुछ जरूरी सामान जैसे बर्तन, कंबल और तिरपाल भी ले गए. यह सब देखकर भी दोनों आरोपियों को शक हुआ, लेकिन उन्होंने चुप्पी बनाए रखी.
अगले दिन यानी हमले वाले दिन दोपहर के समय, उन्होंने उन्हीं आतंकियों को बैसरन इलाके में एक बाड़ के पीछे छिपे हुए देखा. उस वक्त तक साफ था कि कुछ बड़ा होने वाला है. इसके बावजूद उन्होंने न तो पुलिस को बताया और न ही किसी स्थानीय संगठन को इसकी जानकारी दी.
हमले से पहले आखिरी मौका भी गंवाया
22 अप्रैल को दोपहर करीब 12:30 बजे आतंकियों को देखे जाने के बावजूद दोनों आरोपियों ने कोई कदम नहीं उठाया. वे वहां से अपने टट्टुओं के साथ दूर चले गए और अपने काम में लग गए. करीब एक घंटे बाद, यानी 1:00 से 1:30 बजे के बीच उन्होंने पर्यटकों को सुरक्षित पहलगाम पहुंचाया, लेकिन उस दौरान भी उन्होंने किसी को खतरे के बारे में आगाह नहीं किया.
इसके कुछ ही देर बाद आतंकियों ने हमला कर दिया और 26 लोगों की जान चली गई. जांच में सामने आया कि अगर उस समय सूचना दे दी जाती, तो सुरक्षा बल समय रहते कार्रवाई कर सकते थे और कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं.
हमले के बाद भागने की कोशिश
जब बैसरन में हुए हमले की खबर फैली, तो परवेज और बशीर को समझ आ गया कि यह वही आतंकी हैं जिन्हें उन्होंने पनाह दी थी. खुद को बचाने के लिए उन्होंने तुरंत अपनी अस्थायी झोपड़ी छोड़ दी और वहां से भाग गए. वे कुछ समय तक छिपते रहे, लेकिन राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने उन्हें ढूंढ निकाला. 22 जून 2025 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और उनसे गहन पूछताछ शुरू की गई.
पाकिस्तान कनेक्शन और चार्जशीट
इस मामले में जांच के दौरान पाकिस्तान से जुड़े कई अहम सबूत भी सामने आए. दिसंबर 2025 में NIA ने इस पूरे मामले में चार्जशीट दाखिल की. इसमें परवेज और बशीर के अलावा मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट, तीनों विदेशी आतंकी और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन टीआरएफ का नाम शामिल किया गया.
खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया के जरिए भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली. एक भ्रामक पोस्ट में ‘जिब्रान’ नाम के आतंकी का जिक्र किया गया था. जांच में पाया गया कि यह पोस्ट पाकिस्तान के रावलपिंडी और बहावलपुर से जुड़े नंबरों से संचालित हो रही थी. इससे इस हमले में पाकिस्तान की भूमिका को और मजबूती मिली.


