पाकिस्तान फिर पहुंचा आईएमएफ के दरबार, 1.2 अरब डॉलर की नई मदद मंजूर, कब खत्म होगी आर्थिक निर्भरता की कहानी

पाकिस्तान एक बार फिर आर्थिक संकट में आईएमएफ के पास पहुंचा है। नई डील के तहत उसे 1.2 अरब डॉलर की मदद मिली है, लेकिन सवाल उसकी हालत पर ही उठ रहे हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास पहुंचा है। आर्थिक संकट ने उसे मजबूर कर दिया है। देश को चलाने के लिए उसे बाहरी मदद की जरूरत पड़ रही है। सरकार ने आईएमएफ से बातचीत की। इसके बाद नई आर्थिक मदद को मंजूरी मिली। यह स्थिति बार-बार सामने आ रही है। इससे पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी साफ दिखती है।

कितनी राशि मिली इस बार?

इस बार पाकिस्तान को कुल 1.2 अरब डॉलर की मंजूरी मिली है। यह रकम दो अलग-अलग योजनाओं के तहत दी जाएगी। इसमें एक हिस्सा विस्तारित कोष सुविधा के तहत है। दूसरा हिस्सा जलवायु से जुड़ी योजना के तहत मिलेगा। बोर्ड की अंतिम मंजूरी के बाद पैसा जारी होगा। इससे कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलेगी। लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

आईएमएफ से कैसे बनी सहमति?

आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच लंबी बातचीत हुई। फरवरी से मार्च तक कई दौर की चर्चा चली। पहले कोई नतीजा नहीं निकला था। बाद में ऑनलाइन बातचीत जारी रही। अंत में दोनों पक्ष सहमत हो गए। आईएमएफ ने कहा कि समीक्षा सफल रही है। इसके बाद इस मदद को मंजूरी दी गई। यह समझौता कई शर्तों के साथ हुआ है।

किन योजनाओं के तहत पैसा मिलेगा?

यह मदद दो योजनाओं के तहत दी जा रही है। पहली योजना ईएफएफ है जो 37 महीने की है। दूसरी योजना आरएसएफ है जो 28 महीने की है। ईएफएफ के तहत करीब 1 अरब डॉलर मिलेंगे। आरएसएफ के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर मिलेंगे। दोनों योजनाएं अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं। इससे अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश होगी।

पाकिस्तान की हालत क्यों खराब है?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। महंगाई और कर्ज ने हालात बिगाड़ दिए हैं। विदेशी निवेश भी कम हुआ है। सरकार को बार-बार कर्ज लेना पड़ रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में भी समस्याएं हैं। सुधार की गति धीमी है। यही कारण है कि संकट खत्म नहीं हो पा रहा है।

क्या सुधारों से बदलेगी तस्वीर?

आईएमएफ की शर्तों में कई सुधार शामिल हैं। सरकार को खर्च नियंत्रित करना होगा। टैक्स व्यवस्था को मजबूत करना होगा। ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने होंगे। बाजार में भरोसा बढ़ाना होगा। अगर ये सुधार सही से लागू हुए तो स्थिति बेहतर हो सकती है। लेकिन यह आसान नहीं होगा।

आगे क्या रहेगा पाकिस्तान का रास्ता?

पाकिस्तान के सामने बड़ी चुनौती है। उसे आत्मनिर्भर बनना होगा। बार-बार मदद लेने से समस्या हल नहीं होगी। आर्थिक नीतियों में बड़ा बदलाव जरूरी है। अगर सुधार नहीं हुए तो संकट बना रहेगा। आने वाला समय तय करेगा कि पाकिस्तान संभल पाता है या नहीं।

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