ईरान ने दुबई, कुवैत और इजरायल में किया बड़ा हमला, संकट गहराया
ईरान ने कुवैत एयरपोर्ट और दुबई में कथित अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों का दावा किया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया. इसी बीच हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर मिसाइल दागी, जिसे इजरायल ने रोक दिया और क्षेत्र में संघर्ष और गहरा गया.

मध्य पूर्व में शनिवार को तनाव अचानक चरम पर पहुंच गया, जब ईरान की ओर से कई सैन्य कार्रवाइयों का दावा किया गया. ईरानी सेना ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले करने की बात कही, जिससे वहां की रडार प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा. कुवैत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, इस हमले के बाद हवाई यातायात संचालन प्रभावित हुआ और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल सख्त करना पड़ा.
ईरान का दावा
ईरान ने इसी दिन एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने संयुक्त अरब अमीरात में स्थित एक ड्रोन-रोधी प्रणाली के डिपो को निशाना बनाया है. यह डिपो कथित तौर पर यूक्रेन से जुड़ा था और अमेरिकी सेना की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने सरकारी टीवी पर प्रसारित बयान में कहा कि दुबई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ इस डिपो को भी सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया. गौरतलब है कि इससे कुछ समय पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था और रक्षा सहयोग को लेकर सहमति जताई थी.
इसी बीच क्षेत्र में संघर्ष का दायरा और बढ़ता नजर आया. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने शनिवार तड़के इजरायल पर मिसाइल हमला करने का दावा किया. हालांकि, इजरायली सेना ने कहा कि उसने इस मिसाइल को बीच में ही रोक लिया और कोई बड़ा नुकसान नहीं होने दिया. यह हमला ऐसे समय में हुआ जब इजरायल पहले ही ईरान के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने की चेतावनी दे चुका था और उसने ईरान के परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई करने की बात कही थी.
दुबई को लेकर ईरान का दावा
दुबई को लेकर भी ईरान ने चौंकाने वाले दावे किए. ईरानी मीडिया के मुताबिक, वहां अमेरिकी सेना के दो गुप्त ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां बड़ी संख्या में सैनिक मौजूद थे. दावा किया गया कि इन ठिकानों में सैकड़ों अमेरिकी जवान छिपे हुए थे और ईरानी मिसाइल तथा ड्रोन हमलों में उन्हें भारी नुकसान हुआ. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.
इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता को और गहरा कर दिया है. लगातार बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से यह आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की स्थिति बन सकती है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है.


