नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार (28 जून) को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और सतत विकास के क्षेत्र में किए गए योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया. इस उपलब्धि के साथ प्रधानमंत्री मोदी के नाम किसी विदेशी देश से मिलने वाला यह 34वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान दर्ज हो गया. यह सम्मान न केवल उनके नेतृत्व की वैश्विक पहचान है, बल्कि भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का भी प्रतीक माना जा रहा है.
सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया. यह पुरस्कार उन नेताओं को दिया जाता है, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और सतत विकास के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया हो. इस सम्मान के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के लंबे समय से जारी हरित विकास से जुड़े प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है.
सेशेल्स तटरक्षक अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश के तटरक्षक बल को भारत में निर्मित एक तेज गश्ती पोत भी सौंपा. इस पहल को हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत अपने समुद्री साझेदार देशों की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार सहयोग कर रहा है.
पुरस्कार मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रहे सभी देशों को समर्पित किया. संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि भारत के 1.4 अरब नागरिकों के लिए भी गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि वह इस सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं और इसे उन सभी देशों को समर्पित करते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी मानते हुए जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ रहे हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब सेशेल्स अपनी आजादी के 50 वर्ष पूरे कर रहा है. साथ ही भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की भी स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि बीते पांच दशकों में दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और मित्रता से विश्वास, विश्वास से सहयोग और सहयोग से जनकल्याण तक का सफर तय किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि हिंद महासागर सदियों से भारत और सेशेल्स को जोड़ने का माध्यम रहा है. व्यापार, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों को इस समुद्र ने हमेशा मजबूती दी है.
पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं. मई 2026 में खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने उन्हें खाद्य सुरक्षा मजबूत करने, कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए **एग्रीकोला पदक** से सम्मानित किया था. इसके अलावा वर्ष 2018 में उन्हें समावेशी विकास, वैश्विक सहयोग और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सियोल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था. इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार से भी सम्मानित किया था.
सेशेल्स दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की. दोनों नेताओं ने भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा की और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में भी दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ.
प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे थे, जहां स्टेट हाउस में राष्ट्रपति हर्मिनी ने उनका औपचारिक स्वागत किया. राष्ट्रपति के निमंत्रण पर पहुंचे प्रधानमंत्री सोमवार को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इस दौरान वह सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा को भी संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात करेंगे.
भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-स्तर पर मजबूत संबंध रहे हैं. हिंद महासागर क्षेत्र में सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है. ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, विकास सहयोग और वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भविष्य में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने का आधार भी बनेगी. First Updated : Sunday, 28 June 2026