नेपाल में फिर भड़क सकती है बगावत! अंतरिम पीएम सुशीला कार्की ने दी गंभीर चेतावनी

नेपाल में लोकतंत्र दिवस के अवसर पर अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने देश की राजनीतिक स्थिति और युवाओं की बढ़ती नाराज़गी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नेपाल में लोकतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने देश की राजनीतिक स्थिति और युवाओं की बढ़ती नाराज़गी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार युवाओं की असंतोषजनक भावनाओं और उनकी मांगों को समय रहते नहीं समझती और समाधान नहीं करती तो देश एक बार फिर बड़े पैमाने पर विद्रोह की स्थिति में पहुंच सकता है. 

 संबोधन में विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख

काठमांडू स्थित नेपाली सेना के आर्मी पवेलियन में 76वें लोकतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का असली अर्थ केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को न्याय, समान अवसर और जवाबदेह शासन देना है. प्रधानमंत्री कार्की ने अपने संबोधन में पिछले वर्ष सितंबर में हुए Gen-Z नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि उस आंदोलन का मूल उद्देश्य भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना था. आंदोलन में शामिल युवाओं की मांग थी कि शासन व्यवस्था पारदर्शी हो और हर नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिले.

कार्की ने कहा कि सरकार को ऐसे आंदोलनों को दबाने के बजाय संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और विनम्रता के साथ जवाब देना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की ताकत होते हैं और उनकी ऊर्जा, बदलाव की इच्छा और नैतिक आक्रोश देश को सही दिशा में ले जा सकता है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेपाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बावजूद सामाजिक असमानता और भेदभाव की समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं. संविधान में समानता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है, लेकिन व्यवहार में कई स्तरों पर असमानता बनी हुई है. 

उन्होंने कहा कि सत्ता और संसाधनों पर कुछ लोगों के एकाधिकार ने आम जनता के विश्वास को कमजोर किया है, जिससे असंतोष और विद्रोह की भावना को बढ़ावा मिला है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं को कमजोर करके कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता और यदि उनकी अपेक्षाओं की अनदेखी की गई, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने क्या कहा?

इस अवसर पर नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी लोकतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यह दिन नेपाली जनता के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है और देश को शांति, सुशासन, विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है. राष्ट्रपति ने 1950 की ऐतिहासिक क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने राणा शासन के 104 वर्षों के निरंकुश शासन का अंत किया और आधुनिक लोकतांत्रिक नेपाल की नींव रखी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र दिवस नागरिक अधिकारों के महत्व और शहीदों के बलिदान की याद दिलाने का अवसर है.

वहीं दूसरी ओर, नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए अप्रत्यक्ष रूप से राजशाही की वापसी की संभावना की ओर संकेत किया है. लोकतंत्र दिवस के अवसर पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि देश एक जटिल राष्ट्रीय संकट का सामना कर रहा है और यदि इस संकट का समाधान किए बिना चुनाव कराए गए, तो इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है. उन्होंने कहा कि जनता में देश की संप्रभुता और स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ रही है और पिछले राजनीतिक परिवर्तनों के परिणामों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए.

5 मार्च को प्रतिनिधि सभा के चुनाव

गौरतलब है कि नेपाल में 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा के चुनाव होने वाले हैं, जो पिछले वर्ष हुए हिंसक युवा प्रदर्शनों के बाद पहला आम चुनाव होगा. इन प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी और देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी. वर्तमान परिस्थितियों में लोकतंत्र दिवस के मौके पर दिए गए इन बयानों ने नेपाल की राजनीतिक दिशा और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है. यह स्पष्ट है कि देश की स्थिरता और लोकतांत्रिक मजबूती के लिए सरकार को युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा और जनता का भरोसा फिर से जीतना होगा.

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