बांग्लादेश में सियासी तूफान, खालिदा जिया की मौत को लेकर शेख हसीना पर इल्जाम

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद सियासी भूचाल आ गया है. उनकी पार्टी बीएनपी ने सीधे तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद सियासी माहौल गर्मा गया है. उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी का कहना है कि खालिदा जिया की मौत की जिम्मेदारी से शेख हसीना को अलग नहीं किया जा सकता.

बीएनपी का आरोप है कि लंबे समय तक जेल में रखे जाने, उचित इलाज न मिलने और विदेश में उपचार की अनुमति न दिए जाने के कारण खालिदा जिया की सेहत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसका अंत उनकी मौत के रूप में हुआ. इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है.

अंतिम संस्कार से पहले पढ़ा गया बयान

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य नजरुल इस्लाम खान ने जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में खालिदा जिया के अंतिम संस्कार से पहले पार्टी की ओर से एक लिखित बयान पढ़ा. इस मौके पर अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, बांग्लादेशी सशस्त्र बलों के प्रमुख और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद थे.

नजरुल इस्लाम खान लंबे समय से खालिदा जिया के करीबी राजनीतिक सहयोगी रहे हैं और उन्होंने इस बयान के जरिए सीधे तौर पर शेख हसीना को कटघरे में खड़ा किया.

नजरुल इस्लाम खान ने क्या कहा?

बयान में नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि खालिदा जिया को 8 फरवरी 2018 से दो वर्षों से अधिक समय तक एक झूठे मामले में जेल में रखा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें सही इलाज नहीं मिला, जिससे उनकी सेहत गंभीर रूप से बिगड़ गई.

उन्होंने कहा,"पूरे देश ने देखा कि जो नेता खुद चलकर जेल गई थीं, वह एकांत कारावास से गंभीर रूप से बीमार होकर बाहर निकलीं."

नजरुल ने आगे दावा किया कि इसके बाद चार वर्षों की नजरबंदी के दौरान भी उनकी हालत और खराब होती चली गई, क्योंकि उन्हें विदेश में इलाज कराने की अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने कहा,"इसका नतीजा यह हुआ कि इस महान नेता की आखिरकार मौत हो गई. इसलिए, फासीवादी हसीना को इस मौत की ज़िम्मेदारी से कभी भी मुक्त नहीं किया जा सकता."

पिछले पांच हफ्तों से चल रहा था इलाज

बेगम खालिदा जिया का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया. वह लंबे समय से दिल और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं. ढाका के एवरकेयर अस्पताल में पिछले पांच हफ्तों से उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने सुबह करीब छह बजे अंतिम सांस ली.

राजनीति में एक युग का अंत

1945 में भारत के वर्तमान पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में जन्मीं खालिदा जिया ने बांग्लादेश की राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय तक अहम भूमिका निभाई. वह 1991 से 1996 तक और फिर 2001 से 2006 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं. वह इस पद पर पहुंचने वाली बांग्लादेश की पहली महिला थीं.

उनके पति जनरल जिया उर रहमान देश के स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व सैन्य शासक रह चुके हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत का संकेत है और इससे बीएनपी को आने वाले चुनावों में मतदाताओं की सहानुभूति मिल सकती है.

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