नए साल की खुशी में छुपा है बड़ा खतरा! इस ट्रेंड की वजह से है एंग्जायटी का खतरा, जानें क्या है पूरा मामला

नया साल शुरू होते ही सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है. यह ट्रेंड फॉलो करने वालों के लिए तो खैर अच्छी है. लेकिन ये ट्रेंड वीडियो देखने वाले सख्स के लिए खतरा साबित हो रहा है.

नया साल आते ही सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड जोर पकड़ रहा है और वो है "2025 प्रशंसा केक".  इसमें लोग अपने लिए केक खरीदते या बनाते हैं, पिछले साल की छोटी-बड़ी उपलब्धियों को कागज पर लिखते हैं और उन्हें केक पर सजाते हैं. यह विचार अच्छा लगता है, क्योंकि छोटी खुशियों का जश्न मनाना सकारात्मक है. लेकिन यही ट्रेंड कई लोगों में चिंता और दबाव भी बढ़ा रहा है.

छोटी जीतों का जश्न क्यों जरूरी ?

छोटी सफलताओं को मान्यता देना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है. अध्ययनों से पता चलता है कि कृतज्ञता अभ्यास से जीवन में संतुष्टि बढ़ती है और तनाव कम होता है. मनोचिकित्सकों के अनुसार, रोजमर्रा की उपलब्धियों को सेलिब्रेट करना चुनौतियों से निपटने की ताकत देता है. यह ट्रेंड लोगों को आत्मचिंतन की ओर ले जाता है और बीते साल की अच्छी यादों को याद दिलाता है. 

क्यों बढ़ रही चिंता ?

यह ट्रेंड अनजाने में दबाव पैदा कर रहा है. जब सफलता को सिर्फ दिखने वाली उपलब्धियों -जैसे नौकरी, प्रमोशन या ट्रिप तक सीमित कर दिया जाता है, तो कई लोग खुद को छोटा महसूस करते हैं. जिन्होंने साल भर मानसिक संघर्ष किया, बर्नआउट से उबरे, विषाक्त रिश्ते छोड़े या सिर्फ जिंदा रहने की लड़ाई लड़ी, उनकी प्रगति को कोई "मील का पत्थर" नहीं मिलता. 

सोशल मीडिया पर दूसरों की चमकदार उपलब्धियां देखकर तुलना शुरू हो जाती है, जिससे अपराधबोध और निराशा बढ़ती है. नए साल का समय पहले से ही आत्ममूल्यांकन का दबाव लाता है. लोग सोचते हैं कि साल फायदेमंद था या नहीं. सोशल मीडिया यह भ्रम पैदा करता है कि सबकी जिंदगी परफेक्ट चल रही है, जबकि असल संघर्ष छिपे रहते हैं. खासकर 20-40 साल के लोग समय बीतने के डर से परेशान होते हैं.

नए साल की चिंता के संकेत

  • रात में अचानक जीवन का हिसाब-किताब करने की बेचैनी
  • उत्सव के बीच उदासी या रोने का मन करना
  • दूसरों से अपनी जिंदगी की तुलना करना
  • अधूरे लक्ष्यों का अपराधबोध
  • 1 जनवरी से ही खुद को "बेहतर" बनाने का दबाव

इससे निपटने के आसान तरीके

सबसे पहले खुद पर दया रखें. आत्मचिंतन करें, लेकिन खुद को कोसें नहीं. सफलता की परिभाषा बदलें- इसमें भावनात्मक मजबूती, बुरी आदतें छोड़ना या मुश्किल दिनों में भी आगे बढ़ना शामिल है. 

सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीमित करें, खासकर साल के आखिरी और पहले हफ्ते में जरूर करें. नए संकल्पों की सख्त समयसीमा न रखें, बदलाव कभी भी शुरू किया जा सकता है.

कठोर लक्ष्यों की जगह "इरादे" बनाएं, जैसे ज्यादा किताबें पढ़ना या रोज टहलना. ध्यान, गहरी सांस या योग जैसे अभ्यास शामिल करें. दोस्तों-परिवार के साथ समय बिताएं और छोटी खुशियों का मजा लें. याद रखें, नया साल कोई परीक्षा नहीं है. आप जैसे हैं, वैसे ही काफी हैं. 

सबसे बड़ी जीत अक्सर दिखती नहीं जैसे हार न मानना, खुद का ख्याल रखना या चुपचाप ठीक होना. इन्हें भी जश्न मनाने लायक समझें, भले ही सिर्फ पसंदीदा फिल्म देखकर या आराम करके जरूर सेलिब्रेट करें.

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