प्रदर्शन, फांसी और धमकी: ईरान पर हमला करना अमेरिका के लिए आसान नहीं, जानें कारण

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक युवक को मौत की सजा से अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है. ट्रंप की चेतावनी के बावजूद, ईरान की मजबूत सैन्य शक्ति और राजनीतिक हालात अमेरिका की सीधी कार्रवाई को मुश्किल बनाते हैं.

Shraddha Mishra

ईरान में सरकार के खिलाफ जारी हिंसक प्रदर्शन अब लगातार 18वें दिन में पहुंच चुके हैं. इन प्रदर्शनों के बीच 26 वर्षीय युवक इरफान सुलतानी को फांसी दिए जाने की आशंका ने पूरी दुनिया का ध्यान ईरान की ओर खींच लिया है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इरफान को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और केवल तीन दिन बाद 11 जनवरी को हिंसा भड़काने का दोषी मानते हुए उन्हें मौत की सजा सुना दी गई.

इस फैसले के बाद न केवल ईरान के भीतर आक्रोश बढ़ा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता गहराई है. मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों ने ईरान की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू किया, तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सवाल बेहद अहम है कि क्या अमेरिका वास्तव में ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई कर पाएगा.

जानकारों के अनुसार, अमेरिका के लिए ईरान के खिलाफ कदम उठाना आसान नहीं है और इसके पीछे कई बड़े कारण हैं।

ईरान की मजबूत सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था

ईरान की स्थिति किसी कमजोर देश जैसी नहीं है. यहां सत्ता केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मजबूत सैन्य और वैचारिक ढांचे पर आधारित है. इस ढांचे को बाहर से हिलाना बेहद कठिन माना जाता है.

ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) है. इसके पास डेढ़ लाख से अधिक प्रशिक्षित जवान हैं, जो किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देने में सक्षम हैं. IRGC के पास अपनी अलग वायुसेना, नौसेना, मिसाइल यूनिट और साइबर यूनिट भी है, जिससे यह एक पूर्ण सैन्य ताकत बन जाती है.

हमला हुआ तो जवाब तय

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा. जवाबी कार्रवाई तेज, योजनाबद्ध और कई मोर्चों पर हो सकती है. ईरान पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल को भी निशाना बना सकता है. 

इसके अलावा, ईरान के सैन्य ठिकाने पूरे देश में फैले हुए हैं. ऐसे में एक साथ ऐसा हमला करना, जिससे ईरान पूरी तरह कमजोर हो जाए, लगभग असंभव माना जाता है.

युद्ध का असर ईरान के अंदर और बाहर

अगर सीधी जंग शुरू होती है, तो इसका असर ईरान के अंदर चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी पड़ सकता है. युद्ध की स्थिति में देश में राष्ट्रवाद बढ़ता है, जिससे सरकार को अंदरूनी समर्थन मिल सकता है और विरोध कमजोर हो सकता है.

वहीं अमेरिका के लिए भी यह युद्ध आसान नहीं होगा. अमेरिका पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में उलझा है. ईरान के साथ युद्ध लंबा, खर्चीला और राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है.

ट्रंप की राजनीति और घरेलू दबाव

ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजना अमेरिका के लिए बड़ा जोखिम होगा. इससे न केवल सैन्य नुकसान की आशंका है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी इसका विरोध हो सकता है. खासतौर पर ट्रंप का समर्थन करने वाला वर्ग विदेशों में युद्ध के खिलाफ रहा है. ऐसे में सीधी कार्रवाई से उनका वोटबैंक नाराज हो सकता है.

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