चीन में उभरा विद्रोह की आग, गुइझोउ प्रांत में दाह संस्कार नियम के खिलाफ जिनपिंग के पूर्वजों की कब्रें उखाड़ने की खुली धमकी

चीन के गांवों में इस साल अभी तक ग्रामीण इलाक़ों में 661 बड़े विरोध-प्रदर्शन हो चुके हैं और चौंकाने वाली बात ये है कि ये आंकड़ा पूरे 2024 के मुकाबले 70% ज्यादा है. यानी गांव वाले अब चुप नहीं बैठ रहे. महंगाई, जमीन हड़पने, प्रदूषण या सरकारी नीतियों से तंग आकर सड़कों पर उतर रहे हैं. शहरी चीन की चकाचौंध के पीछे गांवों में गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि शांत ग्रामीण चीन की पुरानी तस्वीर अब धुंधली पड़ रही है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: दुनिया भर में चीन की छवि एक ऐसे देश की रही है जहां सरकार की आलोचना करना या आंदोलन करना जनता के लिए लगभग असंभव माना जाता है. लेकिन हाल के महीनों में यह तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है. चीन के गांवों में लोग अब खुलकर अपने हक की आवाज उठा रहे हैं और विरोध-प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. इसी कड़ी में दक्षिणी गुइझोउ प्रांत में भड़का नया जन आंदोलन चीन के ग्रामीण असंतोष की ताजा मिसाल बन गया है.

पिछले साल की तुलना में इस साल चीन के गांवों में विद्रोह और विरोध-प्रदर्शनों में 70% की वृद्धि दर्ज की गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस प्रांत में जनता इतने बड़े पैमाने पर विरोध क्यों कर रही है?

क्यों भड़का गुइझोउ प्रांत में विरोध?

 रिपोर्ट के अनुसार शिदोंग शहर में यह विरोध सप्ताहांत में तब शुरू हुआ, जब स्थानीय अधिकारियों ने एक नया नियम लागू किया कि अब मृत्यु के बाद लोगों को दफनाने के बजाय उनका दाह संस्कार किया जाएगा. गुइझोउ एक गरीब और ग्रामीण इलाका है, जो शेनझेन और शंघाई जैसे बड़े शहरों से काफी दूर है.

इस नियम ने विशेष रूप से मियाओ जातीय समुदाय को आक्रोशित कर दिया, जिनकी पारंपरिक प्रथा मृतक को दफनाने की है, न कि दाह संस्कार करने की. अब प्रशासन उन्हें अपनी परंपरा के उलट कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है.

 जनता का गुस्सा फूटा

इन प्रदर्शनों के दौरान लोग चीनी राष्ट्रपति पर निशाना साधने से भी नहीं हिचक रहे. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक ग्रामीण को कहते सुना गया कि यदि कम्युनिस्ट पार्टी पूर्वजों की कब्रें खोद रही है, तो पहले शी जिनपिंग की पैतृक कब्रों को खोदें.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को यह हक किसने दिया कि वह बताए कि वे अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार कैसे करें. इस निर्णय को उनकी परंपरा और पहचान पर सीधा प्रहार माना जा रहा है.

ग्रामीण इलाकों में क्यों बढ़ रहे हैं आंदोलन?

फ्रीडम हाउस द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट चाइना डिसेंट मॉनिटर के अनुसार इस साल चीन के ग्रामीण इलाकों में अब तक 661 विरोध-प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं. यह संख्या 2024 की तुलना में 70% अधिक है. 2025 की तीसरी तिमाही में CDM ने लगभग 1,400 अशांति की घटनाएं दर्ज कीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 45% अधिक हैं. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि चीन के ग्रामीण समाज में असंतोष उबल रहा है और सरकार के कठोर निर्णयों ने इस गुस्से को और भड़का दिया है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag