बलूचिस्तान में FC मुख्यालय के पास फिदायीन हमला, विदेशी विशेषज्ञों के लिए बने कंपाउंड को बनाया निशाना

पाकिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने एक जोरदार हमला किया है. यह धमाका इतना बड़ा था कि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इसमें कितने लोग मारे गए या घायल हुए हैं. तनावपूर्ण इलाके में एक बार फिर खतरनाक स्थिति बन गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार रात बड़ा हमला हुआ, जब नोकुंदी इलाके में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के मुख्यालय के पास फिदायीनों ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे दी. यह हमला उस संवेदनशील कंपाउंड में किया गया था, जहां रिको डिक और सैंडक खनन परियोजनाओं से जुड़े विदेशी विशेषज्ञ, इंजीनियर और स्टाफ तैनात और ठहरे हुए थे.

रविवार देर रात करीब 9 बजे हुए इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ली है. हमले ने न केवल पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उन परियोजनाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता खड़ी कर दी है जिन्हें पाकिस्तान दुनिया के सबसे सुरक्षित निवेश क्षेत्र के रूप में प्रचारित कर रहा था.

BLF ने ली हमले की जिम्मेदारी

हमले की पुष्टि करते हुए BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलूच ने बयान जारी कर बताया कि इस फिदायीन कार्रवाई को BLF की सादो ऑपरेशनल बटालियन (SOB) यूनिट ने अंजाम दिया. हमलावरों ने पहले पांच बड़े धमाके किए और फिर सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी. जिस कंपाउंड को निशाना बनाया गया था, वह विदेशी इंजीनियरों और विशेषज्ञों की कार्य एवं आवासीय सुविधा के लिए बनाया गया था.

इलाके में हाई अलर्ट, अस्पतालों में इमरजेंसी

हालांकि अब तक मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं हुई है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार चगाई जिले के सभी अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है. यह वही क्षेत्र है, जिसे पाकिस्तान अपनी सबसे सुरक्षित विदेशी निवेश परियोजना का हिस्सा बताकर दुनिया भर में प्रमोट कर रहा था.

रिको डिक और सैंडक प्रोजेक्ट को लेकर पाक का बड़ा दावा

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिको डिक और सैंडक खनन परियोजनाओं पर भारी निवेश आकर्षित करने का दावा कर रहा था. जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिका को रिको डिक खान में निवेश का औपचारिक प्रस्ताव दिया था. पाकिस्तानी सरकार लगातार यह कह रही थी कि रिको डिक दुनिया की सबसे बड़ी सोना–तांबा खदानों में शामिल है, जिसके भीतर खरबों डॉलर मूल्य का संसाधन मौजूद है.

कुछ समय पहले ही अमेरिकी आयात-निर्यात बैंक (EXIM) ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये का कर्ज भी स्वीकृत किया था. लेकिन इसी परियोजना से जुड़े विदेशी स्टाफ के लिए बनाए गए कंपाउंड पर हुए इस फिदायीन हमले ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है.

अपने ही पाले आतंकवाद का शिकार बना पाकिस्तान

पिछले दिनों पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं में तेज बढ़ोतरी हुई है. 24 नवंबर को पेशावर स्थित FC हेडक्वार्टर पर भी इसी तरह का बड़ा फिदायीन हमला हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के प्रॉक्सी समूह जमात-उल-अहरार ने ली थी. पिछले 10 दिनों में पाकिस्तानी सेना ने 30 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है, जिनमें से कई ऐसे थे जिन्हें ISI और जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में हमले करने के लिए प्रशिक्षित किया था. लेकिन बाद में वे TTP में शामिल हो गए और पाकिस्तान के खिलाफ ही लड़ाई में उतर आए.

इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि पिछले तीन दशक से जिस आतंकवाद को पाकिस्तान ने पाल-पोसकर पड़ोसी देशों की ओर धकेलने की कोशिश की, वही अब उसके लिए सबसे बड़ा संकट बन चुका है.

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