तालिबान मंत्री की भारत यात्रा रद्द, संयुक्त राष्ट्र पैनल ने ठुकराई छूट की मांग, अब आगे क्या?
पाकिस्तान वर्तमान में 1988 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति का नेतृत्व कर रहा है. जो तालिबान के प्रतिबंधित नेताओं पर लगे प्रतिबंधों को लागू करने का जिम्मा संभालती है. यह समिति वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है, और पाकिस्तान की यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाती है.

Afghanistan Minister Amir Khan Muttaqi: तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की इस महीने प्रस्तावित भारत यात्रा उस समय रद्द कर दी गई जब उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1988 प्रतिबंध समिति से यात्रा प्रतिबंध में छूट नहीं मिल पाई. अगर यह दौरा होता तो मुत्ताकी अशरफ गनी सरकार के पतन और अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत का दौरा करने वाले पहले तालिबान मंत्री बनते. यूएन प्रतिबंधों के तहत शामिल सभी तालिबान नेताओं को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दौरे के लिए विशेष अनुमति लेनी होती है. मुत्ताकी के लिए भारत दौरे की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन सुरक्षा परिषद के एक सदस्य द्वारा आपत्ति जताने पर यह अनुमति रद्द कर दी गई. इस प्रकरण में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अटकलें तेज हैं, क्योंकि वर्तमान में वह 1988 प्रतिबंध समिति की अध्यक्षता कर रहा है.
पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि इस्लामाबाद ने मुत्ताकी की यात्रा में अड़ंगा डाला. सुरक्षा परिषद की 1988 समिति में सभी 15 सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होती है और किसी एक सदस्य की आपत्ति से भी अनुमति रोकी जा सकती है. मुत्ताकी की पूर्व में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा को भी अमेरिका द्वारा आपत्ति जताने के कारण रद्द करना पड़ा था.
विदेश मंत्रालय का प्रतिक्रिया से परहेज
जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में मुत्ताकी की भारत यात्रा पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की. उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ हमारे दीर्घकालिक संबंध हैं. भारत अफगान लोगों की आकांक्षाओं और विकास संबंधी जरूरतों का समर्थन करता रहेगा. हम अफगान अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं. अगर इस मामले में कोई अपडेट होगा, तो हम उसे आपके साथ साझा करेंगे.
मुत्ताकी की भारत यात्रा को मई में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके बीच हुई फोन वार्ता की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा था. यह दोनों पक्षों के बीच पहली आधिकारिक बातचीत थी, जो जनवरी में दुबई में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और मुत्ताकी की बैठक के बाद हुई थी. तालिबान ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा भी की थी. जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद में नई दिशा मिलने की संभावना बनी थी.
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की रणनीति
भारत पिछले कुछ वर्षों में तालिबान नेतृत्व के साथ चुपचाप संपर्क बनाए हुए है, खासकर ऐसे समय में जब चीन अफगानिस्तान में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. भारत के लिए अफगान क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना अहम है. 1 सितंबर को मुत्ताकी और जयशंकर के बीच फिर एक बार फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें भारत द्वारा अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भेजी गई राहत सामग्री पर चर्चा हुई थी.
यात्रा स्थगित या रद्द
सूत्रों के मुताबिक, मुत्ताकी की भारत यात्रा को रद्द नहीं बल्कि स्थगित किया गया है. अगर प्रतिबंध समिति से छूट मिलती है, तो आगामी महीनों में यह दौरा संभव हो सकता है. भारत और तालिबान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की यह प्रक्रिया दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों में एक अहम कड़ी बन सकती है.तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की इस महीने प्रस्तावित भारत यात्रा उस समय रद्द कर दी गई जब उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1988 प्रतिबंध समिति से यात्रा प्रतिबंध में छूट नहीं मिल पाई. अगर यह दौरा होता, तो मुत्ताकी अशरफ गनी सरकार के पतन और अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत का दौरा करने वाले पहले तालिबान मंत्री बनते.


