ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी! लगातार दूसरी बार नहीं सुनाया फैसला, सुनवाई की अगली तारीख तय नहीं
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ की वैधता पर फैसला टाल दिया है. अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई. कानूनी और आर्थिक असर वाले इस मामले पर अब फरवरी में निर्णय संभव माना जा रहा है.

नई दिल्लीः अमेरिका की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ की वैधता को लेकर बड़ा फैसला फिलहाल टाल दिया है. मंगलवार को अदालत ने कई अहम मामलों में फैसले सुनाए, लेकिन ट्रंप की टैरिफ नीति से जुड़े इस बहुप्रतीक्षित मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं दिया. इससे यह साफ हो गया है कि इस मामले में कानूनी अनिश्चितता अभी और बनी रहेगी.
कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख भी तय नहीं की
सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर अपने फैसलों की तारीख पहले से घोषित नहीं करता, लेकिन इस बार न तो फैसला सुनाया गया और न ही अगली सुनवाई की कोई तारीख बताई गई. इससे संकेत मिलता है कि न्यायाधीश इस संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले मामले पर अतिरिक्त मंथन करना चाहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को अदालत ने तीन अन्य मामलों में फैसले दिए, लेकिन टैरिफ से जुड़ा मामला एक बार फिर टल गया.
पहले भी टल चुका है फैसला
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर फैसला टाला गया हो. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ट्रंप की वैश्विक टैरिफ नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं दिया था. लगातार हो रही देरी ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिका की आर्थिक और व्यापार नीति से जुड़ा हुआ है.
कानूनी अधिकारों पर उठे सवाल
5 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान दिए गए तर्कों से यह साफ झलकता है कि अदालत के भीतर इस बात को लेकर गंभीर संदेह है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप के पास टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार था या नहीं. यह टैरिफ 1977 के एक कानून के तहत लगाए गए थे, जो आपातकालीन परिस्थितियों में राष्ट्रपति को विशेष शक्तियां देता है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ट्रंप ने इस कानून का दायरा बढ़ाकर उसका गलत इस्तेमाल किया, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी था.
आर्थिक नीति पर मंडराता सवाल
टैरिफ ट्रम्प प्रशासन की सबसे अहम आर्थिक नीतियों में से एक रहे हैं. इनका असर न केवल अमेरिका के भीतर उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ा, बल्कि वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी इसका गहरा प्रभाव देखा गया. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल कानूनी नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अब और इंतजार क्यों?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थगन का मतलब है कि इस मामले का निपटारा होने में कम से कम एक और महीना लग सकता है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह के अवकाश पर जाने की तैयारी कर रहा है. अदालत की सामान्य प्रक्रिया को देखते हुए, टैरिफ से जुड़े फैसले की अगली संभावित तारीख 20 फरवरी मानी जा रही है.
वैश्विक नजरें फैसले पर टिकीं
इस मामले पर केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के देश नजर बनाए हुए हैं. अगर कोर्ट यह तय करता है कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टैरिफ लगाए थे, तो इससे भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपतियों की आर्थिक शक्तियों पर बड़ा असर पड़ सकता है. वहीं, अगर ट्रंप के फैसले को वैध ठहराया जाता है, तो यह राष्ट्रपति को आपातकालीन कानूनों के तहत और व्यापक अधिकार देने का रास्ता खोल सकता है.


