Greenland विवाद से पहले भी डेनमार्क से ये द्वीप खरीद चुका है अमेरिका, जानें क्या है 100 साल पुरानी कहानी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करके ही मानेंगे. ट्रंप ने विरोध करने वाले देशों को अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी भी दे दी है. ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का साफ कहना है कि सुरक्षा को देखते हुए ग्रीनलैंड हमारे लिए बहुत जरूरी है. ट्रंप के मुताबिक ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का कोई अधिकार नहीं है.

नई दिल्ली : ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका का रुख अब पहले से कहीं अधिक सख्त और आक्रामक होता जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल इस द्वीप को अपने देश की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है, बल्कि उनके इस विचार का विरोध करने वाले देशों को अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दे दी है. इस बयान के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. वाशिंगटन का तर्क है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधन उसे वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम बनाते हैं.
डेनमार्क के अधिकारों पर अमेरिका का सवाल
अमेरिका और डेनमार्क के पुराने सौदे की कहानी
ग्रीनलैंड विवाद के बीच एक ऐतिहासिक तथ्य यह भी सामने आता है कि करीब सौ साल पहले अमेरिका ने डेनमार्क से कुछ द्वीप खरीदे थे. उस समय इन द्वीपों को डेनिश वेस्ट इंडीज कहा जाता था, जो बाद में वर्जिन आइलैंड्स के नाम से जाने गए. ये द्वीप कैरेबियाई सागर में स्थित हैं और आज पूरी तरह अमेरिका का हिस्सा हैं. इस क्षेत्र की कुल आबादी करीब 90 हजार है और इसमें मुख्य रूप से तीन बड़े द्वीप शामिल हैं, जिनके साथ लगभग 40 छोटे-छोटे द्वीप और टापू भी जुड़े हुए हैं.
उपनिवेशवाद और आबादी का ऐतिहासिक पहलू
वर्जिन आइलैंड्स का इतिहास उपनिवेशवाद से गहराई से जुड़ा हुआ है. यूरोपीय शासन के दौरान यहां खेती के लिए अफ्रीका से लोगों को लाया गया था, जिनकी संताने आज भी वहां निवास करती हैं. इससे पहले यह द्वीपसमूह डेनमार्क का उपनिवेश हुआ करता था और उससे भी पहले यूरोपीय देशों के बीच इन द्वीपों पर कब्जे को लेकर संघर्ष होता रहता था. समुद्री लुटेरे भी इन द्वीपों का इस्तेमाल अपने ठिकानों के रूप में करते थे, जिससे यह इलाका लंबे समय तक अस्थिर बना रहा.
ग्रीनलैंड बना नई वैश्विक टकराव की जमीन
ग्रीनलैंड पर अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति में रणनीतिक क्षेत्रों का महत्व कितना बढ़ गया है. जहां अमेरिका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, वहीं डेनमार्क और उसके समर्थक देश इसे संप्रभुता का मामला मानते हैं. इस विवाद ने न केवल अमेरिका-यूरोप संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि आने वाले समय में यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े टकराव का रूप भी ले सकता है.


