ग्रीनलैंड नहीं है डेनमार्क का हिस्सा...ट्रंप की चेतावनी के बीच रूसी विदेश मंत्री का बड़ा बयान
अमेरिका और डेनमार्क के बीच ग्रीनलैंड को लेकर चली रही राजनीतिक विवाद ने तूफान खड़ा कर दिया है. इस बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वाभाविक हिस्सा नहीं हैं. रूसी विदेश मंत्री के इस बयान से ऐसा लग रहा जैसे उन्होंने आग में घी डालने का काम किया है.

नई दिल्ली : ग्रीनलैंड विवाद ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर नियंत्रण स्थापित करने की बार-बार की गई टिप्पणियों ने पहले ही डेनमार्क और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों में खटास पैदा कर दी थी. अब इस विवाद में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे अमेरिका, यूरोप और रूस के बीच जुबानी जंग और तेज होने की आशंका बढ़ गई है.
रूस के बयान से विवाद को नया मोड़
अमेरिका पर रूस की सफाई और नाराजगी
रूसी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि रूस की ग्रीनलैंड के मामलों में हस्तक्षेप करने की कोई मंशा नहीं है और वाशिंगटन भी इस बात से अवगत है कि मॉस्को की द्वीप पर कब्जा करने की कोई योजना नहीं है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद कि रूस भी ग्रीनलैंड पर नजर बनाए हुए है, रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. लावरोव का बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है, जिसे अमेरिका के दावों का खंडन माना जा रहा है.
ट्रंप की नीति से यूरोप में नाराजगी
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के आक्रामक रुख ने यूरोपीय देशों को असहज कर दिया है. ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए न सिर्फ ग्रीनलैंड पर पूर्ण अमेरिकी नियंत्रण की बात दोहराई है, बल्कि उन यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दी है जो अमेरिका के इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. यूरोपीय संघ का कहना है कि इस तरह के टैरिफ पिछले वर्ष हुए व्यापार समझौतों का उल्लंघन होंगे और इससे ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.
यूरोपीय संघ की संभावित जवाबी कार्रवाई
यूरोपीय संघ के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे. गुरुवार को ब्रुसेल्स में एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन बुलाया गया है, जिसमें अमेरिका के संभावित टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर उसके रुख पर जवाबी रणनीति पर चर्चा होगी. यूरोपीय देशों का मानना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और उस पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है.
ग्रीनलैंड बना महाशक्तियों की रणनीति का केंद्र
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और आर्कटिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक अहमियत ने उसे वैश्विक शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना दिया है. अमेरिका, यूरोप और अब अप्रत्यक्ष रूप से रूस की टिप्पणियों ने इस विवाद को सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे वैश्विक कूटनीतिक टकराव का प्रतीक बना दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह विवाद बातचीत से सुलझता है या अंतरराष्ट्रीय राजनीति में और तनाव पैदा करता है.


