IIT कानपुर में पीएचडी छात्र ने किया सुसाइड, छठवीं मंजिल से छलांग लगाकर दे दी जान...सामने आई ये बड़ी वजह
आईआईटी कानपुर में सुसाइड के मामले कम होने का नाम ही नहीं ले रहे है. आज यानी मंगलवार को एक पीएचडी छात्र ने बिल्डिंग की दूसरी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी है. मृतक की पहचान रामस्वरूप इशराम के रूप में हुई है. वह IIT कैंपस में ही अपनी पत्नी और छोटी बच्ची के साथ रहता था. हैरान करने वाली बात यह है कि बीते 22 दिनों में IIT कैंपस में दो छात्रों ने आत्महत्या कर ली है.

उत्तर प्रदेश : IIT कानपुर के परिसर में मंगलवार दोपहर एक पीएचडी छात्र ने अपने जीवन का अंत कर लिया. छात्र रामस्वरूप इशराम थे, जो अर्थ साइंस विभाग में पीएचडी कर रहे थे. यह घटना संस्थान में भय और शोक का माहौल पैदा कर रही है, क्योंकि पिछले 22 दिनों में यह दूसरी आत्महत्या है और इससे पहले भी कई छात्रों ने इसी संस्थान में अपनी जान दी है. रामस्वरूप अपनी पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ कैंपस में रहते थे, इसलिए इस घटना ने उनके परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया है. छात्र के साथ रहने वाले लोगों ने बताया कि वह कई दिनों से परेशान था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि वह इतनी बड़ी कदम उठाएगा.
आपको बता दें कि यह दुखद घटना IIT की AA-21, न्यू एसबीआरए बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर हुई. कानपुर पुलिस के अनुसार छात्र अचानक दूसरी मंजिल से नीचे कूद गया. घटना की सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने उसे नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि छात्र ने आत्महत्या की है, लेकिन कारणों की सही जानकारी के लिए जांच जारी है. छात्र की पत्नी से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि क्या परिवार या शोध संबंधी दबावों ने उन्हें इस कदम की ओर धकेला.
डिप्रेशन से जूझ रहा था छात्र
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में यह संकेत दिया है कि छात्र डिप्रेशन से जूझ रहा था. DCP कासिम आब्दी ने बताया कि मामले की हर पहलू की जांच की जा रही है और आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जाएगा. रामस्वरूप राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले थे और IIT कैंपस में ही परिवार के साथ रहते थे. इस घटना ने यह सवाल फिर से उठाया है कि क्या उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अकादमिक दबाव, शोध की चुनौतियाँ, और व्यक्तिगत जीवन की जटिलताएं मिलकर छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर कर सकती हैं, और ऐसे में संस्थान को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए.
IIT कानपुर में आत्महत्या की घटनाओं का सिलसिला
दरअसल, IIT कानपुर में आत्महत्या का यह सिलसिला नया नहीं है. पिछले 26 महीनों में यहां कुल नौ छात्रों और शोधकर्ताओं ने आत्महत्या की है. इनमें कई नाम शामिल हैं, जैसे शोध सहायक डॉ. पल्लवी चिल्का, एम.टेक छात्र विकास मीणा, पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल, पीएचडी छात्र प्रगति, पीएचडी स्कॉलर अंकित यादव, सॉफ्टवेयर डेवलपर दीपक चौधरी, बीटेक छात्र धीरज सैनी और जय सिंह मीणा.
इन घटनाओं ने संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह मांग बढ़ा दी है कि IIT कानपुर में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ. इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों की मानसिक भलाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.


