आशा, निराशा के साथ नंगे पांव उम्मीदों के साथ गाजा की ओर बढ़ रहे बच्चे, बूढ़े और जवान...

इजरायली बमबारी से प्रभावित गाजा के निवासी युद्धविराम के बाद घर लौटने की उम्मीद लेकर वापस आ रहे हैं. सोमवार को एक बड़ी भीड़ गाजा के तटीय मार्ग से उत्तर की ओर बढ़ रही थी. कुछ लोग बैसाखी पर धीरे-धीरे चल रहे थे. कुछ के पास छोटे बच्चे थे. कुछ ने चप्पलें पहन रखी थीं, जबकि कई लोग नंगे पांव भी चल रहे थे.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

इजरायली बमबारी से प्रभावित गाजा के निवासी युद्धविराम के बाद घर लौटने की उम्मीद लेकर वापस आ रहे हैं. सोमवार को एक बड़ी भीड़ गाजा के तटीय मार्ग से उत्तर की ओर बढ़ रही थी. यह तस्वीरें उन हजारों फिलिस्तीनियों की थीं, जो गाजा के नेत्ज़ारिम गलियारे के चेकपॉइंट की ओर बढ़ रहे थे, जो गाजा के एन्क्लेव को दो भागों में विभाजित करता है. इन सड़कों पर चलने वाले लोग अलग-अलग हालात में थे, जिनमें युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे. कुछ लोग बैसाखी पर धीरे-धीरे चल रहे थे. कुछ के पास छोटे बच्चे थे. कुछ ने चप्पलें पहन रखी थीं, जबकि कई लोग नंगे पांव भी चल रहे थे.   

युद्ध के बाद घर लौटने की ललक

गाजा के निवासियों के लिए यह यात्रा केवल एक भौतिक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह घर वापसी और परिवारों से मिलन की उम्मीदों से भरी हुई थी. हजारों लोग अपने प्रियजनों से मिलने की उम्मीद लेकर सड़क पर थे. उनके चेहरे पर खुशी और राहत की झलक थी. कुछ लोग अपने साथ टेंट और गद्दे लेकर यात्रा कर रहे थे क्योंकि वे एन्क्लेव के मध्य और दक्षिणी भागों में शरण लेने वाले थे. इस दौरान कुछ लोग वाहनों में यात्रा कर रहे थे, जैसे कार, ट्रक और रिक्शा, जबकि कुछ पैदल ही यात्रा कर रहे थे.   

इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौता

इस यात्रा का कारण इजरायल और हमास के बीच हुआ युद्धविराम समझौता था, जिसके तहत उत्तरी गाजा के निवासी सप्ताहांत में वापस लौटने वाले थे. हालांकि, पहले इजरायल ने क्रॉसिंग को बंद कर दिया था, क्योंकि उसने आरोप लगाया कि हमास ने 29 वर्षीय इजरायली नागरिक अर्बेल येहुद को रिहा नहीं किया, जिससे समझौता उल्लंघन हो गया था. लेकिन फिर कतर के मध्यस्थों द्वारा यह घोषणा की गई कि हमास ने दो अन्य बंधकों के साथ येहुद को सौंपने पर सहमति जताई है, जिसके बाद इजरायल ने 7 बजे चेकपॉइंट खोलने का फैसला किया.  

वापसी की ललक और दर्दनाक अनुभव

इस युद्धविराम के बाद गाजा के उत्तरी भागों में रहने वाले लगभग 650,000 फिलिस्तीनी नागरिकों को उनके घर लौटने का मौका मिला. कई परिवारों के लिए यह दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने महीनों तक गंदे तंबू शिविरों में बिताए थे. सना अल-क़स्साब, जो अपनी छोटी बेटी के साथ घर लौट रही थीं, उन्होंने कहा कि उन्हें उत्तरी गाजा में अपने घर वापस जाने की कोई उम्मीद नहीं थी. सना और उनकी बेटी तीन दिन तक ठंड और भूख में इस मौके का इंतजार कर रहे थे. 

नम आंखों से मिलन का पल

गाजा के निवासी इस दिन को अपने परिवारों से मिलने की उम्मीद के रूप में देख रहे थे. मोहम्मद अदास 19 वर्ष के हैं, उन्होंने बताया कि वह डेढ़ साल से अपने परिवार से नहीं मिल पाए थे. वह इस पल का इंतजार कर रहे थे, जब उन्हें अपने माता-पिता से मिलने का मौका मिलेगा. वहीं, पांच बच्चों की मां घदा ने कहा कि घर लौटने की उम्मीद में उन्हें नींद नहीं आ रही थीय उन्होंने कहा, "मैंने सब कुछ पैक कर लिया है और दिन की पहली किरण के साथ ही जाने के लिए तैयार हूं."

युद्ध और बर्बादी के बाद की आशा

गाजा के निवासियों के लिए यह यात्रा सिर्फ घर वापस लौटने का एक तरीका नहीं थी, बल्कि यह उन भयावह दिनों के बाद आशा और नई जिंदगी की शुरुआत थी. इजरायली बमबारी में 47,000 से अधिक लोग मारे गए थे. 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए संघर्ष के बाद गाजा की स्थिति गंभीर थी. इस संघर्ष में हमास द्वारा इजरायल पर हमला करने के बाद इजरायली अधिकारियों का कहना था कि 1,200 इजरायल नागरिक मारे गए और 251 लोग बंधक बना लिए गए थे. 

भविष्य की उम्मीदें और शांति की जरूरत

गाजा में युद्धविराम के बाद फिलिस्तीनी नागरिकों को अपने घर लौटने का मौका मिल रहा है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है. यहां के लोग अब शांति की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उन्हें एक स्थिर और सुरक्षित जीवन मिल सके. उन्होंने महसूस किया कि युद्ध के बाद की यह शांति कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह जीवन की पुनः शुरुआत का अवसर है. जैसे जैसे लोग घर वापस लौट रहे हैं, उनकी उम्मीदें और आशाएं फिर से जगी हैं कि शायद अब वे अपने परिवारों के साथ एक शांतिपूर्ण जीवन बिता सकेंगे.

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