ईरान को लेकर ट्रंप का सख्त रुख, बोले 'सबसे अच्छी बात होगी सत्ता परिवर्तन'
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी सैन्य तैनाती के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन को "सबसे अच्छी बात" बताया है. उनके इस बयान ने परमाणु वार्ता, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर बड़ा बयान दिया है. अमेरिकी युद्धपोतों की बढ़ती तैनाती और रुकी हुई कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ट्रंप ने संकेत दिया कि तेहरान में शासन परिवर्तन "सबसे अच्छी बात हो सकती है".
उत्तरी कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने ईरान के धार्मिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. उनके बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर रहा है और परमाणु समझौते को लेकर वार्ताएं निर्णायक मोड़ पर हैं.
सत्ता परिवर्तन पर खुला बयान
ईरान के इस्लामी धार्मिक नेतृत्व को हटाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "ऐसा लगता है कि यही सबसे अच्छी बात हो सकती है.” उन्होंने ईरान के शासन पर 47 वर्षों से केवल बयानबाज़ी करने का आरोप लगाया और कहा, “वे 47 सालों से सिर्फ बातें कर रहे हैं, कर रहे हैं और कर रहे हैं. इस बीच, उनकी बातों के चलते हमने बहुत सी जानें गंवा दी हैं."
संघर्ष के मानवीय नुकसान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "पैर उखड़ गए, हाथ उखड़ गए, चेहरे उखड़ गए. यह संघर्ष लंबे समय से चल रहा है.” हालांकि उन्होंने संभावित उत्तराधिकारी का नाम लेने से इनकार किया और केवल इतना कहा, “कुछ लोग हैं."
मध्य पूर्व में सैन्य दबाव बढ़ा
ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई जब उन्होंने मध्य पूर्व में दूसरे अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह की तैनाती की पुष्टि की. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर समझौता नहीं हो पाता है, तो हमें इसकी ज़रूरत पड़ेगी. यह बहुत जल्द रवाना होगा. एक अभी-अभी वहाँ पहुँचा है. अगर ज़रूरत पड़ी तो हमारे पास एक बहुत बड़ी सेना तैयार रहेगी."
राष्ट्रपति ने तत्काल सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की, लेकिन यह संकेत दिया कि कूटनीति विफल होने की स्थिति में अमेरिका विकल्पों के साथ तैयार है.
यूएसएस फोर्ड की तैनाती
दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड कैरिबियन से मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. यह पहले से क्षेत्र में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ जाएगा.
फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कई महीनों से वेनेजुएला में अमेरिकी अभियानों के तहत कैरिबियन में सक्रिय था. इसकी पुनः तैनाती से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य विकल्पों का दायरा काफी बढ़ गया है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह कदम तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
ईरान के लिए बुरा दिन की चेतावनी
ट्रंप ने कूटनीति की सफलता की उम्मीद जताई, लेकिन साथ ही सख्त चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वे सफल होंगे. अगर वे सफल नहीं हुए, तो ईरान के लिए बहुत बुरा दिन होगा, बेहद बुरा."
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परमाणु समझौते पर प्रगति "अगले महीने के आसपास" हो सकती है और कहा, "यह जल्दी होना चाहिए. उन्हें बहुत जल्दी सहमत हो जाना चाहिए."
नेतन्याहू से बातचीत
बुधवार को ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लंबी चर्चा की. उन्होंने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से तेहरान के साथ वार्ता जारी रखने को कहा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि किसी भी समझौते में ईरान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने और हमास और हिज़्बुल्लाह को समर्थन बंद करने की शर्त शामिल हो.
मानवाधिकार और आंतरिक दबाव
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से बताया गया कि हालिया कार्रवाई में 7,005 लोग मारे गए और 53,000 से अधिक गिरफ्तार हुए. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है.
इस बीच खाड़ी के अरब देशों ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य टकराव से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है, खासकर गाजा में जारी युद्ध के बाद.
हाल ही में अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया. ईरान ने अमेरिकी ध्वज वाले जहाज को रोकने की भी कोशिश की थी. इस नई तैनाती की जानकारी सबसे पहले The New York Times ने दी थी.
पहलवी का विरोध का आह्वान
अमेरिका में रह रहे रेजा पहलवी, जिन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटाए गए शाह का पुत्र माना जाता है, ने ईरानियों से धार्मिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन तेज करने की अपील की.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने नागरिकों से घरों और छतों से सरकार विरोधी नारे लगाने का आह्वान किया. उन्होंने लिखा, "ईरान में मेरे बहादुर देशवासियों," और कहा कि हाल की सभाओं से स्पष्ट है कि "इस्लामिक गणराज्य क्रूरता और हत्या के माध्यम से भी ईरान को वापस पाने की आपकी इच्छाशक्ति को तोड़ने में विफल रहा है."
उन्होंने 14 फरवरी को "वैश्विक कार्रवाई दिवस" बताते हुए विदेशों में रहने वाले ईरानियों से सड़कों पर उतरने की अपील की और देश के भीतर नागरिकों से 14 और 15 फरवरी को रात 8 बजे छतों से नारे लगाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, "अपनी मांगें बुलंद करें. अपनी एकता दिखाएं."
इसी बीच, AFP की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में हालिया कार्रवाई में मारे गए लोगों के लिए 40 दिनों के शोक समारोह शुरू हो चुके हैं, जिससे इस्लामी गणराज्य पर आंतरिक दबाव और बढ़ सकता है.


