निखिल गुप्ता के जुर्म कबूलने के बाद अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन ने क्या कहा?

भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित एक संघीय अदालत में खालिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित एक संघीय अदालत में खालिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली. 54 वर्षीय गुप्ता को जून 2023 में प्राग के वाक्लाव हावेल हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था और बाद में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित कर अमेरिका लाया गया. 

अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन ने क्या कहा? 

जून 2024 से वह ब्रुकलिन की जेल में बंद है. निखिल गुप्ता ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष दोष स्वीकार किया. उनकी सजा 29 मई को अमेरिकी जिला जज विक्टर मैरेरो द्वारा सुनाई जाएगी. इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन ने कहा कि अमेरिका अपनी धरती पर किसी भी तरह की हिंसक साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा और ऐसे तत्वों को कड़ा संदेश दिया जाएगा.

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, निखिल गुप्ता ने तीन गंभीर आरोपों में दोष स्वीकार किया है. पहला आरोप सुपारी लेकर हत्या की साजिश से जुड़ा है, जिसके तहत अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती हैृ. दूसरा आरोप हत्या के लिए साजिश रचने का है, जिसकी अधिकतम सजा भी 10 साल है. तीसरा आरोप मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश का है, जिसमें अधिकतम 20 साल तक की कैद हो सकती है.

 हत्या का सौदा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस कथित साजिश के तहत 100,000 अमेरिकी डॉलर में पन्नू की हत्या का सौदा तय किया गया था. आरोप है कि गुप्ता ने भारत सहित विभिन्न स्थानों पर मौजूद व्यक्तियों के साथ मिलकर योजना बनाई, जिनमें सह-आरोपी विकास यादव भी शामिल बताए गए हैं. यादव के निर्देश पर गुप्ता ने न्यूयॉर्क में एक कथित सुपारी किलर से संपर्क साधा. हालांकि, जिस व्यक्ति को हत्यारा समझा जा रहा था वह अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी का अंडरकवर एजेंट निकला.

बताया गया कि जून 2023 के आसपास गुप्ता और यादव ने एजेंट को अग्रिम भुगतान के रूप में 15,000 डॉलर नकद देने की व्यवस्था की थी. लेकिन जब यह स्पष्ट हुआ कि पूरा ऑपरेशन एक गुप्त जांच का हिस्सा है, तो साजिश विफल हो गई.

इस मामले पर भारत सरकार ने किसी भी आधिकारिक संलिप्तता से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले कहा था कि अभियोग में उल्लिखित व्यक्ति अब भारत सरकार में कार्यरत नहीं है. भारत ने इसे एक अलग-थलग आपराधिक मामला बताया है और सरकारी भूमिका से इंकार किया है.

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