मिडिल ईस्ट में भड़कती जंग, इजरायल के हमले में ईरान के 2 बड़े कमांडर मारे गए

इजरायल के ताजा हमलों में अली मोहम्मद नैनी और इस्माइल अहमदी की मौत से ईरान को बड़ा झटका लगा है. लगातार हमलों और पहले अली लारिजानी की मौत के बाद ईरान में नेतृत्व और सुरक्षा संकट गहराता जा रहा है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है. ताजा इजरायली हवाई हमलों में ईरान को दो बड़े झटके लगे हैं. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में अली मोहम्मद नैनी और इस्माइल अहमदी की मौत हो गई है, जो देश की सैन्य और खुफिया संरचना के अहम चेहरे थे.

अली मोहम्मद नैनी कौन थे?

ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर के प्रवक्ता और जनसंपर्क विभाग के उप-प्रमुख के रूप में कार्यरत थे. उन्हें जुलाई 2024 में IRGC प्रमुख हुसैन सलामी द्वारा इस पद पर नियुक्त किया गया था. 1957 में जन्मे नैनी ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक थे और उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक विभिन्न भूमिकाओं में फ्रंटलाइन पर सेवा दी थी. इस दौरान वे घायल भी हुए थे.

नैनी अक्सर IRGC की ओर से आधिकारिक बयान जारी करते थे, जिनमें ईरान की सैन्य ताकत, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को लेकर चेतावनी भरे संदेश शामिल होते थे. मार्च 2026 में बढ़ते तनाव के बीच उन्होंने दावा किया था कि ईरान लंबी अवधि के उच्च तीव्रता वाले युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और उसके पास कई उन्नत हथियार अभी भी उपयोग में नहीं लाए गए हैं.

वहीं, दूसरे हमले में बासिज फोर्स के खुफिया प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी भी मारे गए. बासिज, IRGC से जुड़ा एक अर्धसैनिक संगठन है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा, खुफिया गतिविधियों और वैचारिक निगरानी में अहम भूमिका निभाता है. अहमदी इस संगठन में सुरक्षा और खुफिया मामलों के प्रमुख अधिकारी थे और उन्हें कई बार उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया था.

इजरायल का दावा

इजरायल की ओर से दावा किया गया है कि उसने ईरान के 130 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है. इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, ड्रोन (UAV) बेस और रक्षा प्रणालियां शामिल थीं, जो पश्चिमी और मध्य ईरान में स्थित हैं. इजरायली वायु सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और अपनी हवाई बढ़त को मजबूत करना है.

इससे पहले 17 मार्च 2026 को भी इजरायल के हमले में अली लारिजानी की मौत हो चुकी है, जिन्हें ईरान का प्रभावशाली नेता माना जाता था. उनकी मौत के बाद पहले ही ईरान के नेतृत्व में अस्थिरता बढ़ गई थी और अब इन नई घटनाओं ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है.

कुल मिलाकर, लगातार हो रहे हमलों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और नेतृत्व दोनों को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है.

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