2200 सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हुआ अमेरिकी युद्धपोत, क्या कुछ बड़ा होने वाला है?

ट्रंप के ईरान में सैन्य कार्रवाई के संकेत के बीच USS Tripoli मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है, जिससे तनाव बढ़ गया है. अमेरिका का फोकस Strait of Hormuz की सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या ट्रंप, ईरान के खिलाफ जमीनी सैन्य कार्रवाई का फैसला लेंगे. हालांकि, ट्रंप ने इस मुद्दे पर अब तक खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने नई बहस छेड़ दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का शक्तिशाली युद्धपोत USS Tripoli करीब 2,200 मरीन सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है. 

ट्रंप ने मीडिया से क्या कहा?

फिलहाल यह दक्षिण हिंद महासागर में भारत के आसपास के क्षेत्र में देखा गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. जब मीडिया ने इस बारे में ट्रंप से सवाल किया तो उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि वह कहीं भी सेना नहीं भेज रहे हैं और अगर भेजते भी तो इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करते. हालांकि, रक्षा सूत्रों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है. उनकी अप्रत्याशित नीतियों को देखते हुए किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

अमेरिका के संभावित कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित करना माना जा रहा है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम हिस्सा है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है. हालिया संघर्ष के बाद ईरान ने इस रास्ते पर सख्ती बढ़ा दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाजों से भारी शुल्क वसूला जा रहा है और पश्चिमी देशों के जहाजों को धमकियां भी मिल रही हैं.

परमाणु हथियार पर क्या बोले ट्रंप?

दूसरी बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है. खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जो परमाणु हथियार निर्माण में इस्तेमाल हो सकता है. बताया जा रहा है कि यह सामग्री हालिया हमलों के बाद मलबे में दब गई है, जिसे सुरक्षित करने के लिए जमीनी ऑपरेशन जरूरी हो सकता है. ट्रंप पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे.

ऐसे में USS Tripoli की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. इस युद्धपोत पर अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात हैं, जो इसे समुद्र में एक चलती-फिरती सैन्य ताकत बनाते हैं. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका जमीनी कार्रवाई करता है, तो यह पिछले दो दशकों में पहली बड़ी तैनाती होगी, जो मिडिल ईस्ट के हालात को और ज्यादा जटिल बना सकती है.

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