ईरान पर अमेरिका का सबसे बड़ा हमला अभी बाकी! US रक्षा सचिव ने किए बड़े दावे

अमेरिकी रक्षा सचिव ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और और बड़े हमले हो सकते हैं. अमेरिका ने हजारों ठिकानों पर हमले का दावा किया है और लक्ष्य पूरा होने तक युद्ध जारी रखने की बात कही है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को अभी और बड़े हमलों का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह युद्ध अमेरिका की शर्तों पर खत्म होगा और उनकी सेना अपने मिशन को पूरा करके ही रुकेगी. हेगसेथ के अनुसार, अमेरिकी सेना अब तक ईरान के 7,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बना चुकी है.

अमेरिकी रक्षा सचिव ने दावा किया कि हर दिन हमले और अधिक बड़े और प्रभावी हो रहे हैं. उनका कहना है कि जहां अमेरिका की ताकत लगातार बढ़ रही है, वहीं ईरान की सैन्य क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणाली को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है, जिससे अमेरिका को बढ़त मिल रही है.

खारग द्वीप पर हमला क्यों अहम

रक्षा सचिव ने बताया कि खारग द्वीप पर किए गए हमले से ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचा है. यह हमला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका को स्थिति पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है.

शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि

ब्रीफिंग की शुरुआत में हेगसेथ ने उन अमेरिकी सैनिकों को याद किया, जो इस संघर्ष में मारे गए. उन्होंने बताया कि जब इन सैनिकों के शव वापस लाए गए, तब वह खुद और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वहां मौजूद थे. उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवारों ने सरकार से अपील की है कि मिशन को अधूरा न छोड़ा जाए. इस पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि अमेरिका अपने सैनिकों के बलिदान का सम्मान करेगा और लक्ष्य हासिल करके ही रुकेगा.

'लंबा युद्ध' कहने वालों पर निशाना

हेगसेथ ने मीडिया के उन दावों को खारिज किया, जिनमें इस संघर्ष को लंबा और अंतहीन युद्ध बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हकीकत इससे अलग है और अमेरिका पूरी योजना के साथ आगे बढ़ रहा है. उनका कहना है कि इस अभियान के लक्ष्य पहले दिन से ही तय हैं और उसी दिशा में काम हो रहा है.

अमेरिका के मुख्य लक्ष्य क्या हैं

रक्षा सचिव ने साफ किया कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है. इसमें मिसाइल लॉन्चर नष्ट करना, रक्षा उद्योग को खत्म करना और नौसेना को निष्क्रिय करना शामिल है. इसके अलावा सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके.

ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान

हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90% तक कमी आई है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है. अमेरिका ने ईरान के करीब 120 नौसैनिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने या डुबोने का दावा किया है. इसके अलावा 11 पनडुब्बियों के भी निष्क्रिय होने की बात कही गई है.

ईरानी नेतृत्व पर तंज

रक्षा सचिव ने ईरान के सैन्य नेतृत्व पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस समय ईरानी सेना में वरिष्ठ पदों पर काम करना सबसे जोखिम भरा है और ये पद “अस्थायी नौकरी” जैसे हो गए हैं. उन्होंने ईरान की तुलना गाजा में सक्रिय संगठनों से करते हुए कहा कि वहां सुरंगों, मिसाइलों और ड्रोन पर भारी निवेश किया गया है, जिसे अमेरिकी सेना लगातार निशाना बना रही है.

युद्ध पर खर्च और समयसीमा

हेगसेथ ने यह भी स्वीकार किया कि इस युद्ध में भारी खर्च हो रहा है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर और फंड लिया जाएगा, क्योंकि ऐसे अभियानों के लिए संसाधन जरूरी होते हैं. हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि इस अभियान को खत्म करने के लिए कोई तय समय सीमा नहीं रखी गई है. उनका कहना है कि अमेरिका अपने लक्ष्य पूरे होने तक कार्रवाई जारी रखेगा.

सहयोगी देशों का साथ

रक्षा सचिव ने इजराइल को इस पूरे अभियान में एक मजबूत और भरोसेमंद साथी बताया. उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों का सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका को रणनीतिक बढ़त मिल रही है.

अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है. ईरान के खिलाफ उसकी कार्रवाई जारी रहेगी और जब तक उसके सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक यह अभियान चलता रहेगा.

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