क्या ईरान पर हमले की तैयारी में है अमेरिका? ट्रंप के सामने 3 सैन्य विकल्प
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में ठहराव के बीच अमेरिका ने संभावित सैन्य कार्रवाई की नई योजना तैयार की है, जिससे तनाव बढ़ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप सरकार ईरान पर दबाव बनाने के लिए बड़े हमले सहित तीन विकल्पों पर विचार कर रही है.

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों में ठहराव आने के बाद हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं. संघर्ष विराम जारी होने के बावजूद अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी की खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.
ईरान के खिलाफ नए ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने ईरान के खिलाफ नए ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की है. बताया जा रहा है कि कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर इस योजना को डोनाल्ड ट्रंप के सामने पेश करेंगे. इस प्रस्तावित ब्रीफिंग से संकेत मिलते हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े स्तर पर सैन्य अभियान शुरू करने पर विचार कर रहा है. माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य या तो ठप पड़ी शांति वार्ता को फिर से पटरी पर लाना है या संघर्ष समाप्त करने से पहले निर्णायक दबाव बनाना.
इस संभावित कदम की खबर सामने आते ही मध्य पूर्व समेत दुनिया के कई हिस्सों में चिंता और बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि इसका असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि CENTCOM एक त्वरित और तीव्र हमले की रणनीति पर विचार कर रहा है. इसके तहत ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है, जिसमें तेल भंडारण केंद्र और बिजली आपूर्ति तंत्र शामिल हैं. अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसे हमले तेहरान को वार्ता की मेज पर लौटने के लिए मजबूर कर सकते हैं और परमाणु मुद्दे पर नरमी दिखाने के लिए दबाव बना सकते हैं.
अमेरिका के पास तीन प्रमुख विकल्प
अमेरिका के पास इस समय तीन प्रमुख विकल्प बताए जा रहे हैं. पहला, ईरान के नागरिक और औद्योगिक ढांचे पर सीधा हमला करना, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकार गंभीर उल्लंघन मानते हैं. दूसरा, होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर समुद्री व्यापार को सुरक्षित करना, हालांकि इसमें जमीनी सेना की भागीदारी और संभावित हताहतों का जोखिम भी जुड़ा है. तीसरा विकल्प ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को विशेष बलों के जरिए कब्जे में लेने का है, जिसे बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है.


