Video: भारत का मजाक मत उड़ाओ... ट्रंप के टैरिफ पर भड़के श्रीलंकाई सांसद, अमेरिका को सुनाई खरी-खोटी

श्रीलंकाई सांसद हर्षा डी सिल्वा ने संसद में भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता जताई और कहा कि भारत ने 2022 में श्रीलंका के सबसे बड़े आर्थिक संकट में मदद की थी. उन्होंने भारत के खिलाफ अमेरिकी फैसले को अनुचित बताया और श्रीलंका से भारत का समर्थन करने की अपील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीद पर आपत्ति जताकर भारत पर 50% टैरिफ लगाया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

India US Trade Tensions : 11 अगस्त 2025 को श्रीलंका की संसद में एक अहम मुद्दा उठा. सांसद हर्षा डी सिल्वा ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव पर बयान देते हुए भारत का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ को अनुचित बताया और श्रीलंका को चेताया कि इस मसले को हल्के में न लें.

भारत ने संकट में दिया था साथ, अब न भूलें अहसान

आपको बता दें कि सांसद हर्षा डी सिल्वा ने याद दिलाया कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि साल 2022 में जब श्रीलंका अपने आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब वह भारत ही था जिसने बिना शर्त के हमारी मदद की थी. उन्होंने कहा कि जब हम नीचे थे, उस समय भारत ही था जिसने हमारा साथ दिया. अब जब भारत पर संकट आया है, तो उसका मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद थी कि अमेरिका टैरिफ 15% तक कम करेगा, लेकिन उल्टा 50% तक बढ़ा दिया गया.

भारत की मदद ने बचाया था श्रीलंका का तंत्र
2022 के दौरान श्रीलंका की आर्थिक हालत इतनी बिगड़ गई थी कि पेट्रोल पंप खाली हो गए थे, खाद्यान्न और दवाएं खत्म हो रही थीं, और विदेशी मुद्रा भंडार शून्य पर पहुंच गया था. उस समय भारत ने चार अरब डॉलर से ज़्यादा की आर्थिक मदद, मुद्रा विनिमय, मानवीय सहायता, और ऋण स्थगन सुविधा के जरिए श्रीलंका को गिरने से बचाया था.


अमेरिका की ओर से भारत पर क्यों बढ़ा टैक्स
6 अगस्त 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूसी तेल खरीदकर रूस के युद्ध को आर्थिक समर्थन दे रहा है. इसी कारण अमेरिका ने 25% अतिरिक्त टैक्स जोड़कर भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा दिया. भारत ने इसे "अनुचित और पक्षपातपूर्ण" बताया है.

श्रीलंकाई सांसद का संदेश, भारत के साथ खड़े रहें
हर्षा डी सिल्वा का यह बयान न सिर्फ भारत के समर्थन में है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि दक्षिण एशिया के देश भारत की भूमिका और योगदान को गंभीरता से समझते हैं. उनका स्पष्ट संदेश था कि सहयोगी देश को कठिन समय में याद रखना ही सच्चा कूटनीतिक संबंध होता है.

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