रूस-आर्मेनिया में बढ़ा तनाव, पुतिन की 'यूक्रेन वाली' धमकी से भारत की बढ़ी चिंता

भारत के दो करीबी दोस्त रूस और आर्मेनिया के रिश्तों में दरार बढ़ती जा रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनिया पर दबाव तेज कर दिया है ताकि वह पश्चिमी देशों के करीब न जाए।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: भारत के दो करीबी दोस्त रूस और आर्मेनिया के रिश्तों में दरार बढ़ती जा रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनिया पर दबाव तेज कर दिया है ताकि वह पश्चिमी देशों के करीब न जाए। दशकों तक दोनों देश मजबूत सहयोगी रहे हैं। लेकिन अजरबैजान से जंग में रूस के साथ न देने के बाद आर्मेनिया ने अमेरिका और यूरोप की तरफ रुख कर लिया है। 

भारत, ईरान और चीन से हथियार खरीद रहा आर्मेनिया   

अब तक रूस से हथियार लेने वाला आर्मेनिया अब भारत, ईरान और चीन से बड़े पैमाने पर हथियार खरीद रहा है। पुतिन चाहते हैं कि आर्मेनिया रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन को छोड़कर यूरोपीय यूनियन में शामिल होने पर तुरंत जनमत संग्रह कराए। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पश्नियान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। 

पुतिन ने पश्नियान को जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया था। उसी कॉल में पश्नियान ने जनमत संग्रह की मांग ठुकरा दी। आर्मेनिया के पीएम ने रूस की मांग को अनुचित बताया। यह बयान ऐसे समय आया जब रूस आर्मेनिया पर काफी दबाव बना रहा है। 

EAEU समिट में उठी जनमत संग्रह की मांग   

तनाव की शुरुआत 29 मई को कजाखस्तान में हुई EAEU समिट से हुई। वहां रूस, बेलारूस, कजाखस्तान और किर्गिस्तान ने संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने आर्मेनिया से यूरोपीय यूनियन में शामिल होने पर जनमत संग्रह कराने को कहा। पुतिन ने साफ किया कि यूरोपीय संघ और EAEU दोनों की सदस्यता एक साथ मुमकिन नहीं है। 

पुतिन ने इशारों में आर्मेनिया को यूक्रेन जैसी हालत की चेतावनी भी दे दी। उन्होंने याद दिलाया कि यूक्रेन यूरोपीय संघ की सदस्यता चाहता था और उसी वजह से जंग के हालात बने। जवाब में पश्नियान ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी सरकार EAEU के साथ तब तक काम करती रहेगी जब तक उसे रोका नहीं जाता। उन्होंने माना कि रूस के साथ रिश्ते संक्रमण के दौर में हैं।

रूस ने राजदूत वापस बुलाया, आयात पर रोक   

विश्लेषकों का कहना है कि पुतिन की बधाई कॉल के पीछे असल वजह यूरोपीय यूनियन का मुद्दा था। रूस नहीं चाहता कि आर्मेनिया यूरोप के करीब जाए। खासकर तब जब 7 जून को आर्मेनिया में संसदीय चुनाव हैं। रूस ने येरेवान से अपने राजदूत को सलाह के लिए वापस बुला लिया है। साथ ही आर्मेनिया से मछली और सीफूड के आयात पर रोक लगा दी है। इससे आर्मेनिया की अर्थव्यवस्था को झटका लगा है। यूरोपीय संघ का आरोप है कि रूस चुनाव को प्रभावित करना चाहता है।

नगर्नो कराबाख बना विवाद की जड़   

आर्मेनिया कभी रूस का उपनिवेश था। पुतिन चाहते हैं कि वहां रूस की पकड़ बनी रहे। 2023 में अजरबैजान ने नगर्नो कराबाख पर कब्जा कर लिया। आर्मेनिया ने रूस से मदद मांगी, लेकिन मास्को यूक्रेन युद्ध में उलझा रहा। इसके बाद आर्मेनिया ने भारत, ईरान और चीन से हथियार खरीदे। अब वह यूक्रेन से भी रिश्ते सुधार रहा है।

भारत की टेंशन क्यों बढ़ी   

गौरतलब है कि रूस और आर्मेनिया के झगड़े से भारत की मुश्किल बढ़ सकती है। भारत 60 फीसदी हथियार रूस से लेता है। दूसरी तरफ भारत आर्मेनिया को सबसे ज्यादा हथियार बेचता है। अब तक आर्मेनिया ने भारत से करीब 2 अरब डॉलर के हथियार खरीदे हैं।

इनमें पिनाका रॉकेट सिस्टम, तोपें, एंटी टैंक रॉकेट और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। आर्मेनिया भारत से ड्रोन भी ले रहा है। भारत के कई हथियार रूसी तकनीक पर आधारित हैं। ऐसे में रूस की नाराजगी से भारत के रक्षा सौदों पर असर पड़ सकता है।

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