ट्रंप 2.0 का भारत के लिए क्या असर? जानें पहले चार दिनों की अहम बातें

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के शुरुआती चार दिनों में भारत के लिए कोई नकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जबकि टैरिफ और अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया. वहीं, भारत ने भी संभावित टैरिफ चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिकी उत्पादों जैसे व्हिस्की, स्टील और तेल की खरीद बढ़ाने और टैरिफ कम करने की योजना बनाई है.

Simran Sachdeva

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद, उनकी नीतियों और घोषणाओं पर हर जगह कड़ी निगरानी रखी जा रही है. ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को प्राथमिकता देते हुए आयात पर टैरिफ बढ़ाने और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने का वादा किया था. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही थी. हालांकि, रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत के लिए अब तक कुछ भी नकारात्मक नहीं हुआ है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप का बयान

ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने पहले बड़े सार्वजनिक संबोधन में कहा कि टैरिफ बढ़ेंगे, लेकिन उतने नहीं जितना दुनिया ने सोचा था. उन्होंने अमेरिकी उत्पादन और तेल उत्पादन को प्राथमिकता देने का भी संकेत दिया. 

भारत के लिए सकारात्मक पहलू

रिपोर्ट में पता चला है कि शुरुआती 4 दिनों में ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत के लिए कुछ भी नुकसानदायक नहीं हुआ. ट्रंप ने ना तो भारी टैरिफ लगाए और ना ही ऐसा कोई कदम उठाया जो भारत के हितों के खिलाफ हो. तेल की कीमतें भी स्थिर हैं और डॉलर इंडेक्स 108 पर है, जो भारतीय बाजारों के लिए फिलहाल सकारात्मक संकेत है. 

ट्रंप का वादा

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप ने कहा कि हम अमेरिकी नागरिकों की मदद के लिए इतिहास की सबसे बड़ी टैक्स कटौती लाएंगे. यदि आप अमेरिका में अपना उत्पाद बनाएंगे, तो आपको सबसे कम टैक्स मिलेगा. लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते, तो आपको टैरिफ देना होगा, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और कर्ज कम होगा. 

भारत की तैयारी

टैरिफ बढ़ने की संभावना के बीच, भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सरकार टैरिफ कम करने, व्यापार समझौते करने और अमेरिका से अधिक आयात करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है. 

क्या-क्या हो सकता है?

भारत अमेरिकी व्हिस्की, स्टील और तेल की खरीद बढ़ा सकता है. बोरबॉन और पेकन नट्स जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम कर सकता है. भारत पहले से ही अमेरिका के साथ $35.3 बिलियन का व्यापार अधिशेष रखता है और इन कदमों से संभावित संकट को टाला जा सकता है. 

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