एक भी मुसलमान नहीं? रियाद बिजनेस फेयर में भारतीय कारोबारी के साथ हुआ दुर्व्यवहार

रियाद की एक अंतरराष्ट्रीय बिजनेस प्रदर्शनी में भारतीय कंपनी के स्टॉल पर सऊदी के एक व्यक्ति ने धार्मिक आधार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की. वायरल वीडियो में वह हिंदू कंपनी को तंज कसते हुए कहता है, यहां एक भी मुसलमान नहीं है. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश और यूजर्स ने इसे सांप्रदायिक और शर्मनाक बता रहे हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: रियाद में एक बिजनेस प्रदर्शनी के दौरान एक भारतीय कंपनी के स्टॉल पर धार्मिक आधार पर टिप्पणी करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ऑनलाइन भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. यह अनडेटेड क्लिप जिसकी JBT स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है. लेकिन इस किल्प में एक सऊदी व्यक्ति को भारतीय स्टॉल के स्टाफ से बहस करते देखा जा सकता है, जहां वह अपनी कंपनी की धार्मिक पहचान का मजाक उड़ाते हुए कहता है कि इसमें एक भी मुसलमान नहीं है.

यूएई स्थित राजनीतिक विश्लेषक अमजद ताहा ने इस वीडियो को X पर शेयर कर इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे साफ तौर पे नस्लवाद बताया. उन्होंने भारत की सभ्यतागत विरासत का बचाव करते हुए कहा कि भारतीय होना कोई अपमान नहीं है.

इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है, जहां यूजर्स ने इसे नस्लवादी और सांप्रदायिक करार दिया है.

अमजद ताहा का बयान 

अमजद ताहा ने लिखा कि व्यापार कोई मस्जिद की हाजिरी नहीं है और आधुनिक समाज में धर्म के आधार पर पुलिसिंग का कोई स्थान नहीं है. उन्होंने इस व्यवहार को  बेहद शर्मनाक और बिल्कुल अस्वीकार्य बताया. 

सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं 

एक यूजर ने लिखा कि ईरान के बाद मिडिल ईस्ट में नस्लवाद के मामले में सऊदी अरब का दूसरे स्थान पर होना सभी अरब देशों के लिए एक कलंक है. दूसरे ने कहा कि ये तो बहुत बदतमीज़ है. ये आदमी तो व्यापार के लिए वहां गया है, भला किसी के विश्वास के लिए उस पर हमला क्यों करेगा. सऊदी अरब निवेश के लिए अच्छी जगह नहीं है. सऊदी लोग कट्टरपंथी हैं और विविधता को स्वीकार नहीं करते है. एक अन्य यूजर ने भारतीय दूतावास से मांग की, अगर भारतीयों के साथ नस्ल और धर्म के आधार पर भेदभाव किया जाता है तो उन्हें आमंत्रित क्यों किया जाता है? सऊदी किस तरह से श्रेष्ठ हैं?

एक यूजर ने टिप्पणी की, इस वीडियो में जो कुछ भी दिख रहा है वह सरासर नस्लवाद है. यह मूल्यों, धर्म या समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता. यह अज्ञानता और मानसिक रूप से अस्वस्थ वातावरण से प्रभावित एक व्यक्ति को दर्शाता है. व्यवसाय मेहनत, रचनात्मकता और योग्यता पर आधारित होता है. न कि पहचान, आस्था या राष्ट्रीयता पर.

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