विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेरा, मैंने ही पीएम को लोकसभा न आने की दी थी सलाह- स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान
स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकसभा में न आने की सलाह दी थी, विपक्ष सांसदों ने उनकी कुर्सी को घेर लिया था.

नई दिल्ली: लोकसभा में हाल ही में हुए हंगामे पर स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी को घेर लिया था, इसलिए उन्होंने खुद पीएम को सदन में न आने की सलाह दी थी. यह बयान सदन की कार्यवाही के दौरान अव्यवस्था और प्रदर्शन के संदर्भ में आया है.
सदन में क्या हुआ?
बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा चल रही थी. प्रधानमंत्री मोदी का निर्धारित संबोधन शाम 5 बजे होना था, लेकिन विपक्ष की महिला सांसदों ने बैनर लेकर सत्ता पक्ष की बेंचों की ओर मार्च किया। वे अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के विरोध में वेल में पहुंच गईं. हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने पीएम के संबोधन से पहले ही सदन स्थगित कर दिया।
स्पीकर का सख्त रुख
ओम बिरला ने कहा कि कुछ सांसदों ने सदन के अंदर "दुर्व्यवहार" किया. उन्हें पहले से पता था कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष अव्यवस्था फैला सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा, "इस सदन की परंपरा कभी नहीं रही कि राजनीतिक मतभेदों को अध्यक्ष के कार्यालय तक लाया जाए. कल जो हुआ, वह संसद के इतिहास में एक काला धब्बा है." स्पीकर ने बताया कि अप्रत्याशित घटना होने की आशंका थी, इसलिए उनके आग्रह पर पीएम सदन में नहीं आए.
महिला सांसदों ने पीएम की खाली कुर्सी को घेरा
विपक्षी सदस्य अमेरिका-भारत व्यापार डील और नरवणे की किताब से जुड़े मुद्दों पर नारेबाजी कर रहे थे. महिला सांसदों ने पीएम की खाली कुर्सी को घेर लिया, जिससे सदन में तनाव बढ़ गया. स्पीकर के ऑफिस में भी भाजपा और विपक्ष के सांसदों के बीच बहस हुई. कुछ वीडियो में विपक्षी सांसद स्पीकर की कुर्सी के पास पहुंचते दिखे, जिससे संसद की गरिमा पर सवाल उठे.
संसद की गरिमा पर चिंता
स्पीकर ने स्पष्ट किया कि संसद राजनीतिक मतभेदों का मंच है, लेकिन व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ऐसे हंगामे लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं हैं. इस घटना के बाद सदन गुरुवार तक स्थगित रहा. विपक्ष का कहना है कि सरकार मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे अव्यवस्था बताया.


