'अमेरिका-ईरान वार्ता पाकिस्तान में क्यों?'-इमरान खान के बेटे का बड़ा आरोप, सरकार पर साधा निशाना

इमरान खान के बेटे सुलेमान खान ने अमेरिका-ईरान वार्ता के पाकिस्तान में होने पर सवाल उठाते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक संकट छिपाने का आरोप लगाया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच एक नया विवाद सामने आया है. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलेमान खान ने देश के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार लोकतांत्रिक संकट को छिपाने के लिए वैश्विक मंचों का इस्तेमाल कर रही है.

सुलेमान खान ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि पाकिस्तान में एक ओर विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की सकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश हो रही है. उनके इस बयान ने अमेरिका-ईरान वार्ता के पाकिस्तान में होने को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठाए सवाल

चैनल 4 को दिए इंटरव्यू में सुलेमान खान ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया जा रहा है और विरोध करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है.

बढ़ता हुआ तानाशाही तंत्र 

सुलेमान खान ने मौजूदा व्यवस्था को "बढ़ता हुआ तानाशाही तंत्र" बताया.

उन्होंने कहा कि सरकार आलोचना को दबाने में लगी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने पर अधिक ध्यान दे रही है.

इमरान खान की गिरफ्तारी बना बड़ा मुद्दा

सुलेमान खान की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब इमरान खान अगस्त 2023 से विभिन्न मामलों में हिरासत में हैं.

उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं.

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता के लिए पाकिस्तान को चुना गया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी दूतों के पाकिस्तान पहुंचने की संभावना है, हालांकि ईरान ने सीधे संवाद से इनकार किया है.

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, "हमें उम्मीद है यह एक सार्थक बातचीत होगी और उम्मीद है कि इससे किसी समझौते की दिशा में प्रगति होगी."

उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन वार्ता में सक्रिय रहेंगे.

पहला दौर रहा बेनतीजा

इससे पहले 11-12 अप्रैल को हुई पहली वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी.

असहमति के प्रमुख मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और लेबनान में चल रहा संघर्ष शामिल रहे.

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