आग के कुएं में भी सलामत रहा मुरीद, लाल शाहबाज़ कलंदर की मुहब्बत ने लपटों को फूलों में बदल दिया
यह सिर्फ एक करामात की कहानी नहीं है। यह भरोसे की ताकत की कहानी है। एक सच्चे मुरीद की कहानी। इसने अपने रब पर पूरा यकीन रखा। जिसने अपने पीर पर भरोसा किया। और उसी भरोसे ने असंभव को संभव बना दिया। यह कहानी आज भी दिलों में जिंदा है।

एक समय की बात है। एक सच्चा आशिक था। वह अपने पीर की मुहब्बत में डूबा हुआ था। उसका दिल सिर्फ अल्लाह से जुड़ा था। दुनिया की कोई चीज उसे आकर्षित नहीं करती थी। उसका हर ख्याल इबादत में रहता था। वह हर सांस में अपने रब को याद करता था। यही उसकी असली पहचान थी। यही उसकी ताकत थी। लोग उसे दीवाना कहते थे। लेकिन वह अल्लाह का दीवाना था।
क्या बादशाह ने दी थी चुनौती?
एक दिन एक जालिम बादशाह ने उसे दरबार में बुलाया। दरबार भरा हुआ था। लोग तमाशा देखने के लिए खड़े थे। बादशाह ने उसकी आस्था को चुनौती दी। उसने कहा, अगर तेरा अल्लाह सच्चा है, तो आग के कुएं में कूद जा। पूरा माहौल खामोश हो गया। सबकी नजरें उसी मुरीद पर टिक गईं। किसी को उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसा करेगा। लेकिन वह शांत खड़ा रहा। उसकी आंखों में डर नहीं था।
क्या मुरीद को जरा भी डर लगा?
मुरीद ने आसमान की तरफ देखा। उसके चेहरे पर सुकून था। उसके दिल में यकीन था। उसने धीरे से कहा, या अल्लाह, या लाल शाहबाज़, मैं तेरे भरोसे उतरता हूं। उसके शब्दों में ताकत थी। उसकी आवाज में सच्चाई थी। उसने एक कदम आगे बढ़ाया। फिर बिना सोचे समझे आग के कुएं में कूद गया। दरबार में खामोशी छा गई। सबकी सांसें रुक गईं।
क्या सच में आग ठंडी हो गई?
जैसे ही वह कुएं में उतरा, नजारा बदल गया। आग की लपटें शांत होने लगीं। तेज जलती आग ठंडी हो गई। लपटें फूलों में बदल गईं। गर्मी हवा जैसी लगने लगी। वहां खुशबू फैल गई। यह नजारा किसी चमत्कार से कम नहीं था। लोग अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहे थे। हर तरफ सन्नाटा था। यह अल्लाह की रहमत थी।
क्या मुरीद सलामत बाहर आया?
कुछ ही पलों बाद मुरीद बाहर निकला। वह पूरी तरह सुरक्षित था। उसके कपड़े तक नहीं जले थे। उसके चेहरे पर नूर था। उसकी आंखों में सुकून था। यह देखकर बादशाह भी हैरान रह गया। दरबार में खड़े लोग दंग रह गए। किसी के पास शब्द नहीं थे। हर कोई उस पल को देख रहा था।
क्या शहर में गूंज उठा नारा?
इस घटना के बाद पूरे शहर में चर्चा फैल गई। हर गली में यही बात होने लगी। लोग अल्लाह की ताकत को मानने लगे। हर तरफ एक ही नारा गूंजने लगा। लाल शाहबाज़ कलंदर, दमादम मस्त कलंदर। लोगों के दिल बदलने लगे। आस्था और मजबूत हो गई। यह करामात लोगों के दिलों में बस गई।
क्या यह हमें कोई सबक देता है?
यह कहानी सिर्फ एक घटना नहीं है। यह एक सीख है। यह बताती है कि भरोसा क्या होता है। जब इंसान अल्लाह पर पूरा यकीन करता है, तो मुश्किल आसान हो जाती है। जब दिल साफ होता है, तो रास्ते खुल जाते हैं। यह कहानी हमें हिम्मत देती है। यह हमें भरोसा सिखाती है। यही इसका सबसे बड़ा संदेश है।
जब दिल में सच्चा ईमान होता है, तो डर खत्म हो जाता है। जब जुबान पर अल्लाह का नाम होता है, तो रास्ते आसान हो जाते हैं। यह कहानी हमें यही सिखाती है। हर मुश्किल में कहो, हस्बुनल्लाहु वनिमल वकील। फिर देखो, कैसे हालात बदलते हैं। कैसे आग भी ठंडी हो जाती है। और कैसे जिंदगी में सुकून आ जाता है।


