आज है लोहड़ी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, महत्व और दुल्ला भट्टी की रोचक कहानी
उत्तर भारत का सबसे जोशीला लोकपर्व लोहड़ी आज पूरे उमंग के साथ मनाया जा रहा है. पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में घर-घर अलाव जलता है, ठंडी हवा में मूंगफली-रेवड़ी-गजक की खुशबू फैलती है और लोग ढोल-नगाड़ों पर ठुमके लगाते नजर आते हैं.

नई दिल्ली: उत्तर भारत में खुशियों और उल्लास का प्रतीक माना जाने वाला लोहड़ी पर्व आज देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. खास तौर पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इस त्योहार की रौनक देखी जाती है, जहां हर तरफ ढोल की थाप, गिद्दा-भांगड़ा और पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देती है. सर्दी के बीच जलती अलाव की गर्माहट और लोगों की मुस्कान इस पर्व को और भी खास बना देती है.
लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नई फसल के आगमन और सामूहिक खुशियों का उत्सव है. आग के चारों ओर नाचते-गाते लोग आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश देते हैं. अगर आप भी आज शाम लोहड़ी पूजन करने की तैयारी कर रहे हैं, तो इसके शुभ समय और परंपराओं को जानना बेहद जरूरी है.
लोहड़ी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
लोहड़ी इस वर्ष संक्रांति क्षण शाम 04:05 बजे रहेगा, जबकि लोहड़ी दहन और पूजा का उपयुक्त समय शाम 05:45 बजे से रात 08:30 बजे तक माना गया है. मान्यता है कि जब सूर्य अस्त होने को होता है और गोधूलि बेला शुरू होती है, तब लोहड़ी जलाना सबसे शुभ होता है.
कैसे करें लोहड़ी की पूजा?
लोहड़ी की पूजा के लिए घर के खुले आंगन या चौक में लकड़ियों और उपलों का ढेर लगाया जाता है और उसमें अग्नि प्रज्वलित की जाती है. आग जलने के बाद परिवार के सभी सदस्य इसके चारों ओर बैठते हैं और अग्नि की 7 या 11 बार परिक्रमा करते हैं.
परिक्रमा करते समय अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का अर्पित किया जाता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. पूजा संपन्न होने के बाद तिल, गुड़, गजक और मूंगफली को प्रसाद के रूप में एक-दूसरे में बांटा जाता है.
क्यों मनाई जाती है लोहड़ी?
लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से रबी की नई फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है. इस दिन किसान सूर्य देव और अग्नि देव का आभार व्यक्त करते हैं कि उनकी कृपा से फसल अच्छी हुई है. इस पर्व से जुड़ी एक लोककथा भी बेहद प्रसिद्ध है. मुगल काल में दुल्ला भट्टी ने गरीब लड़कियों को बचाकर उनकी शादियां करवाई थीं. इसी वजह से लोहड़ी के लोकगीतों में उनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है.
नई दुल्हन और बच्चों के लिए क्यों है खास?
जिन घरों में हाल ही में शादी हुई होती है या जहां किसी बच्चे का पहला साल पूरा हो रहा होता है, वहां लोहड़ी का उत्सव खास तौर पर मनाया जाता है. इसे “पहली लोहड़ी” कहा जाता है और इस अवसर पर रिश्तेदारों और दोस्तों को बुलाकर भव्य आयोजन किया जाता है.


