Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या के दिन क्यों रखा जाता है मौन? जानिए इसका धार्मिक महत्व

Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ही फलदायी माना गया है. इसके साथ ही इस दिन मौन व्रत रखने का भी विधान है.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

Mauni Amavasya 2025: माघ माह में आने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है और इसे धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व दिया गया है. इस दिन पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पवित्र नदियों में स्नान करने और तर्पण करने का महत्व है. साथ ही, इस दिन मौन व्रत भी रखा जाता है, जिसका खास धार्मिक महत्व है. इस साल मौनी अमावस्या 2 फरवरी 2025 को होगी.

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत क्यों रखा जाता है?

मौनी अमावस्या के दिन लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, गंगा में स्नान करते हैं और दान करते हैं. इसके अलावा, कुछ भक्त इस दिन मौन व्रत भी रखते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है.

धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को काबू में रखना चाहिए. मौन व्रत का मतलब है अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना और धीरे-धीरे अपनी बोलचाल को संयमित करना. इस दिन मौन व्रत रखने से इंद्रियां नियंत्रित होती हैं और अच्छे विचार मन में आते हैं. इस दिन स्नान करने के बाद ही मौन व्रत रखना चाहिए.

मौन व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या का दिन वाणी पर नियंत्रण पाने के लिए बहुत शुभ होता है. इस दिन स्नान करने के बाद, मौन व्रत रखकर अकेले में जाप करना चाहिए. इससे चित्त की शुद्धि होती है और आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है. मौनी अमावस्या के दिन स्नान, जाप और दान करने से पापों का नाश होता है और देवताओं का आशीर्वाद मिलता है. गंगा स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag