अहमदाबाद का विशाल नरेंद्र मोदी स्टेडियम... 2023 की यादें और नए मुकाबले का जबरदस्त इंतजार

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बड़े क्रिकेट मुकाबले से पहले उत्साह चरम पर है. न्यूज़ीलैंड के कप्तान मिशेल सैंटनर के बयान ने मैच का रोमांच बढ़ा दिया है, जबकि प्रशंसक 2023 की यादों के बीच नए नतीजे का इंतजार कर रहे हैं.

Shraddha Mishra

अहमदाबाद का विशाल नरेंद्र मोदी स्टेडियम एक बार फिर बड़े क्रिकेट मुकाबले से पहले उत्साह और उम्मीदों से भर गया है. मैच से एक दिन पहले का माहौल भी किसी त्योहार से कम नहीं दिखा. मैदान के बाहर और अंदर दोनों जगह हलचल नजर आई. खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मियों की एक टीम भी इस खास मौके के उत्साह में शामिल होती दिखाई दी. वे मैदान के अंदर सेल्फी लेते हुए हल्के-फुल्के पलों का आनंद ले रहे थे. यह दृश्य दर्शाता है कि बड़े मैच का रोमांच केवल खिलाड़ियों या दर्शकों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लेता है.

मैच से पहले पिच को धूप से बचाने के लिए जूट के कपड़े से ढका गया था. इसी दौरान न्यूज़ीलैंड के कप्तान मिशेल सैंटनर को 22 गज की इस पिच पर संक्षिप्त नजर डालने का मौका मिला. हालांकि यह सिर्फ कुछ पल का निरीक्षण था, लेकिन इससे मैच को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई.

प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैंटनर ने एक ऐसा बयान दिया जिसने चर्चा तेज कर दी. उन्होंने कहा कि अगर ट्रॉफी जीतने के लिए किसी का दिल टूटता है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी. उनका यह बयान काफी सुर्खियों में रहा और कई लोगों को ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस के उस मशहूर बयान की याद दिला गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे दर्शकों को शांत कर देना चाहते हैं.

अहमदाबाद में हार की याद और उम्मीद

भारतीय टीम ने 2023 में मिली हार से आगे बढ़ते हुए कई खिताब जीते हैं, लेकिन अहमदाबाद के क्रिकेट प्रशंसकों के दिल में उस हार की याद अब भी ताजा है. खासकर जब हाल ही में यहां भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में कुछ लोग इसे महज संयोग मानते हैं, जबकि कुछ के मन में स्टेडियम को लेकर अजीब-सी शंका भी रहती है. क्रिकेट में अंधविश्वास आम बात है. जब कोई बड़ा मुकाबला होता है और इतिहास सामने होता है, तब प्रशंसकों के मन में उम्मीद और चिंता दोनों साथ-साथ रहती हैं.

पुराने मोटेरा की यादें

इस मैदान का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है. पहले इसे मोटेरा स्टेडियम के नाम से जाना जाता था. उस समय यहां की पहचान अलग ही थी. ऊंचे लाइट टावर, पीले-नीले रंग की लगभग 45 हजार सीटें, छोटा सा जिम और बाहर धूल भरा बड़ा पार्किंग क्षेत्र- यह सब उस दौर की अहमदाबाद की झलक दिखाते थे. उस समय स्टेडियम शहर की साधारण लेकिन जीवंत पहचान का प्रतीक था.

नया स्टेडियम और आधुनिक अहमदाबाद

समय के साथ शहर भी बदला और स्टेडियम भी. आज का नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में गिना जाता है. यह सिर्फ खेल का मैदान नहीं बल्कि आधुनिक अहमदाबाद की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रतीक भी है. पिछले कुछ वर्षों में यहां कई बड़े मुकाबले खेले जा चुके हैं. नए रूप में तैयार होने के बाद इस मैदान ने तीन आईपीएल फाइनल और एक वनडे विश्व कप फाइनल की मेजबानी की है. इसलिए बड़े मैचों से पहले यहां का माहौल हमेशा खास रहता है.

दर्शकों की संख्या भी बनती है चर्चा का विषय

इस स्टेडियम की एक और खास बात इसकी विशाल दर्शक क्षमता है. मैच से पहले अक्सर यह चर्चा होती है कि क्या इस बार दर्शकों की संख्या एक लाख के आंकड़े को पार कर पाएगी. अब तक क्रिकेट में ऐसा सिर्फ एक बार हुआ है, जब 2023 के आईपीएल फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात टाइटन्स को हराया था. हालांकि यहां 90 हजार दर्शकों की मौजूदगी भी आम बात मानी जाती है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी संख्या है.

बड़े मुकाबले का इंतजार

मैच से पहले का माहौल साफ बताता है कि क्रिकेट यहां सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा उत्सव है. खिलाड़ी अपनी रणनीति बना रहे हैं, प्रशंसक उत्साह से भरे हैं और पूरा शहर इस बड़े मुकाबले का इंतजार कर रहा है. अब सबकी नजरें मैदान पर होंगी, जहां कुछ ही घंटों में एक और यादगार क्रिकेट कहानी लिखी जा सकती है.

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