इंडिया का फ्यूचर प्लान तैयार, 64 युवा खिलाड़ियों को मिलेगा मौका, चर्चा में वैभन का नाम
भारतीय टेस्ट टीम दिग्गज खिलाड़ियों के रिटायरमेंट के बाद बदलाव के दौर में है, जिसे मजबूत करने के लिए बीसीसीआई युवा खिलाड़ियों पर फोकस कर रहा है. चार-दिवसीय टूर्नामेंट और नई चयन प्रक्रिया के जरिए अगले 10 साल के लिए मजबूत टेस्ट टीम तैयार करने की योजना बनाई गई है.

विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के संन्यास के बाद भारतीय टेस्ट टीम एक बदलाव के दौर से गुजर रही है. इस संक्रमण काल में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर काम कर रहा है. बोर्ड का फोकस केवल मैच जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह खिलाड़ियों की तकनीक, मानसिक मजबूती और लंबी अवधि की तैयारी पर जोर दे रहा है. बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस पूरी योजना को संचालित कर रहा है.
चर्चा में वैभव का नाम
इस नई सोच के केंद्र में युवा प्रतिभाओं को मौका देना शामिल है. खासतौर पर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का नाम तेजी से चर्चा में है, जिन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा है. उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें जल्द राष्ट्रीय टीम में शामिल करने की मांग उठने लगी है. वैभव के अलावा आयुष म्हात्रे और समीर रिजवी जैसे युवा खिलाड़ी भी इस दीर्घकालिक योजना का अहम हिस्सा हैं.
बीसीसीआई ने इसी दिशा में जून-जुलाई के दौरान चार टीमों के बीच एक चार-दिवसीय टूर्नामेंट आयोजित करने का फैसला किया है. इस प्रतियोगिता में कुल 64 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जिनकी उम्र 25 साल से कम होगी. इन मैचों को अलग-अलग तरह की पिचों पर खेलाया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता, धैर्य और विभिन्न परिस्थितियों में ढलने की योग्यता का आकलन किया जा सके.
इस पहल का उद्देश्य सिर्फ एक टूर्नामेंट कराना नहीं, बल्कि आने वाले 10 वर्षों के लिए एक मजबूत टेस्ट टीम तैयार करना है. चयन प्रक्रिया को भी संतुलित रखा गया है. लगभग 25 खिलाड़ी जूनियर स्तर के टूर्नामेंट जैसे कूच बिहार ट्रॉफी और सीके नायडू ट्रॉफी से चुने जाएंगे. वहीं 25 खिलाड़ियों का चयन रणजी ट्रॉफी और घरेलू क्रिकेट सर्किट से होगा, जबकि शेष स्थान इंडियन प्रीमियर लीग में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उभरते खिलाड़ियों को दिया जाएगा.
योजना में अजीत अगरकर और गौतम गंभीर की अहम भूमिका
इस पूरी योजना में चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और हेड कोच गौतम गंभीर की भूमिका बेहद अहम होगी. यह साफ संकेत है कि बीसीसीआई अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति के तहत टीम का निर्माण कर रहा है. इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन के आधार पर ही आगे की टीमों का चयन किया जाएगा. आईपीएल के 19वें सीजन के बाद भारत की अंडर-19 और इमर्जिंग टीम श्रीलंका दौरे पर जाएगी, जहां चार-दिवसीय मुकाबले खेले जाएंगे.
पिछले डेढ़ साल में टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम का दबदबा कुछ कमजोर पड़ा है. लंबे समय तक घरेलू मैदान पर अजेय रहने के बाद टीम को न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में बीसीसीआई अब भविष्य को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है. यदि यह योजना सफल होती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय टेस्ट टीम एक नई पहचान के साथ उभर सकती है.


