यमुना में बढ़ा अमोनिया स्तर, दिल्ली के कई इलाकों में जल आपूर्ति प्रभाव

यमुना नदी में अमोनिया का स्तर अचानक बढ़ने से दिल्ली के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो गई है।.वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों की क्षमता घटने के कारण लोगों को कम दबाव में पानी मिल रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: दिल्ली में एक बार फिर यमुना नदी का प्रदूषण आम लोगों की परेशानी बन गया है. वजीराबाद के ऊपरी हिस्से में यमुना के कच्चे पानी में अमोनिया का स्तर अचानक बढ़ने से राजधानी के कई हिस्सों में जल आपूर्ति बाधित हो गई है. अधिकारियों के मुताबिक, यह स्थिति नदी में प्रदूषकों की बढ़ती मौजूदगी की ओर इशारा करती है.

दिल्ली जल बोर्ड ने बताया कि प्रदूषण में आई इस अचानक वृद्धि का सीधा असर वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों पर पड़ा है, जिससे पानी के उत्पादन में भारी कमी दर्ज की गई है. इसके चलते शहर के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी इलाकों में कम दबाव पर पानी की आपूर्ति की जा रही है.

वजीराबाद और चंद्रावल संयंत्रों की क्षमता घटी

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यमुना के कच्चे पानी में अमोनिया का स्तर बढ़ने से वजीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) की कार्यक्षमता 25% से 50% तक कम हो गई है. दोनों संयंत्र वजीराबाद तालाब के जरिए सीधे यमुना से पानी लेते हैं और दिल्ली के बड़े हिस्से को पेयजल उपलब्ध कराते हैं.

डीजेबी ने एक बयान में कहा, "वजीराबाद तालाब में यमुना से लगातार उच्च प्रदूषकों के आने के कारण वजीराबाद और चंद्रावल जल संग्रहण संयंत्रों में जल उत्पादन 25-50% तक प्रभावित हुआ है. इसलिए, स्थिति में सुधार होने तक कम दबाव पर पानी की आपूर्ति की जाएगी. जनता को पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी जाती है और डीजेबी हेल्पलाइन 1916 पर संपर्क करने पर पानी के टैंकर उपलब्ध रहेंगे."

अमोनिया स्तर उपचार सीमा से तीन गुना अधिक

डीजेबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बुधवार सुबह वजीराबाद में कच्चे पानी में अमोनिया का स्तर 3 पीपीएम से अधिक रिकॉर्ड किया गया, जबकि उपचार की अधिकतम सीमा 1.0 पीपीएम है.

अधिकारी ने कहा, "डीजेबी कच्चे पानी में 0.9 पीपीएम तक अमोनिया का उपचार कर सकता है, लेकिन इससे अधिक स्तर पर क्लोरीन गैस से अमोनिया को बेअसर करने से अक्सर जहरीले क्लोरामाइन यौगिक बन जाते हैं, इसलिए संयंत्रों को सीमित क्षमता पर चलाया जाता है."

मुनक नहर से पानी मोड़ने का फैसला

स्थिति से निपटने के लिए डीजेबी ने यमुना के पानी को पतला करने के उद्देश्य से मुनक नहर से कच्चे पानी को वजीराबाद की ओर मोड़ना शुरू कर दिया है. हालांकि, इससे नहर से सिंचित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है.

इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

वजीराबाद संयंत्र के अंतर्गत डिफेंस कॉलोनी, मजनू का टीला, आईएसबीटी, एनडीएमसी क्षेत्र, आईटीओ, हंस भवन, एलएनजेपी अस्पताल, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, राजघाट, रामलीला ग्राउंड, दिल्ली गेट, सुभाष पार्क, गुलाबी बाग, तिमारपुर, पंजाबी बाग, आज़ादपुर, शालीमार बाग, वज़ीरपुर, लॉरेंस रोड और मॉडल टाउन जैसे इलाके प्रभावित हो सकते हैं.

इसके अलावा दक्षिण दिल्ली के मूलचंद, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश और कैंटोनमेंट क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में भी जल संकट देखा जा सकता है. वहीं, चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के तहत एनडीएमसी, करोल बाग, झंडेवालन, हिंदू राव, सिविल लाइंस, पटेल नगर, राजेंद्र नगर और शादिपुर जैसे इलाकों में असर पड़ रहा है.

आरडब्ल्यूए ने जताई नाराजगी

उत्तर दिल्ली निवासी कल्याण संघ (आरडब्ल्यूए) के अध्यक्ष अशोक भासिन ने बताया कि कई इलाकों में पानी की आपूर्ति या तो बेहद कम दबाव पर हो रही है या पूरी तरह बंद है.

उन्होंने कहा, "सब्जी मंडी और घंटाघर ही नहीं, सुभाष नगर और राजा गार्डन जैसे इलाकों से भी पानी की आपूर्ति को लेकर कोई शिकायत नहीं मिल रही है. लोगों के पास 1000 लीटर की टंकी हैं, इसलिए इसका असर कम हो रहा है, लेकिन हम पीने के पानी के लिए कैन का इस्तेमाल कर रहे हैं."

भासिन ने यह भी कहा कि सरकारें बदलती रहीं, लेकिन प्रदूषण उपचार संयंत्रों को उन्नत करने और बफर जल भंडारण बढ़ाने जैसे स्थायी समाधान अब तक लागू नहीं हो पाए हैं.

दिल्ली-हरियाणा के बीच पुराना विवाद

पिछले कई वर्षों से यमुना में अमोनिया स्तर का बढ़ना दिल्ली और हरियाणा के बीच विवाद का विषय रहा है. डीजेबी का दावा है कि रंग, क्लोराइड और अमोनिया आधारित रसायन पानीपत के औद्योगिक रंग नाले से बहकर यमुना में पहुंचते हैं.

इसके अलावा, डीजेबी सोनीपत में औद्योगिक कचरे के मिश्रण का भी जिक्र करता रहा है, जहां ताजे पानी और औद्योगिक पानी की नहरें महज कुछ इंच की रेत की दीवार से अलग होकर समानांतर चलती हैं. वहीं, हरियाणा सरकार का कहना है कि उसके औद्योगिक क्षेत्रों से प्रदूषण के रिसाव का कोई स्रोत नहीं है.

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