जोशीमठ में सरकारी भवन में नमाज को लेकर विवाद, प्रशासन ने संभाली स्थिति
जोशीमठ में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने बिना औपचारिक अनुमति के एक सरकारी इमारत के भीतर सामूहिक नमाज अदा करना शुरू कर दिया. इससे विवाद खड़ा हो गया.

जोशीमठ में हाल ही में एक सरकारी भवन के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई. आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने बिना औपचारिक अनुमति के एक सरकारी इमारत के भीतर सामूहिक नमाज अदा करना शुरू कर दिया. स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह भवन नगर पालिका द्वारा खेल विभाग को सौंपा गया था और यहां टेबल टेनिस जैसी खेल गतिविधियों के लिए सुविधा विकसित करने की योजना थी.
परिसर का उपयोग नमाज के लिए
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से इस परिसर का उपयोग नमाज के लिए किया जा रहा था और वहां आने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी. इस घटनाक्रम से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किए गए, जिसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया.
स्थानीय लोगों ने सरकारी संपत्ति के धार्मिक उपयोग पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यह स्थान खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया था और नगर पालिका ने पहले ही स्पष्ट किया था कि भवन का इस्तेमाल किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि के लिए नहीं किया जाना चाहिए. कुछ निवासियों ने यह भी कहा कि सरकारी भूमि या भवनों का धार्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नियमों के विरुद्ध है और इसे रोका जाना चाहिए.
हिंदू संगठनों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
क्षेत्र के कुछ हिंदू संगठनों ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने मांग की कि सरकारी संपत्ति का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए हो, जिसके लिए उसे निर्धारित किया गया है. स्थानीय लोगों ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति जारी रखेंगे और प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं.
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है. उनके अनुसार, प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन पर आवश्यक कदम उठाए गए हैं और विवाद को सुलझाने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत की गई है.
जोशीमठ को ज्योतिर्मठ के नाम से भी जाना जाता है. उत्तराखंड के चमोली जिले का एक महत्वपूर्ण पहाड़ी नगर है. यह धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है. यहां स्थित ज्योतिर्मठ की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी और इसे उनके चार प्रमुख मठों में से एक माना जाता है. यह नगर प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के शीतकालीन प्रवास स्थल के रूप में भी जाना जाता है.


