रेखा गुप्ता सरकार के एक साल पूरे, दिल्ली वाले क्यों कर रहे केजरीवाल को याद?

दिल्ली इन दिनों सियासी बहस के केंद्र में है. सोशल मीडिया पर #SufferingDelhiMissesKejriwal ट्रेंड कर रहा है, जिसे विपक्ष जनता की भावना का प्रतिबिंब बता रहा है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारत की राजधानी दिल्ली इन दिनों सियासी बहस के केंद्र में है. सोशल मीडिया पर #SufferingDelhiMissesKejriwal ट्रेंड कर रहा है, जिसे विपक्ष जनता की भावना का प्रतिबिंब बता रहा है. कई इलाकों में लोग पूर्व और वर्तमान सरकार के कामकाज की तुलना करते नजर आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है.

2025 से दिल्ली में आप की सरकार 

फरवरी 2025 से पहले राजधानी में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार थी. उस दौर को पार्टी समर्थक बदलाव और राहत का समय बताते हैं. मोहल्ला क्लीनिकों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा का मॉडल कहा जाता था, जहां आम लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती थी. सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार और बेहतर परीक्षा परिणामों को भी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया. बिजली और पानी पर दी गई सब्सिडी को मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत माना गया. उस समय “दिल्ली मॉडल” को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाया गया.

हालांकि फरवरी 2025 के बाद राजनीतिक परिदृश्य बदल गया. सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी ने नई प्राथमिकताओं के साथ शासन संभाला और मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी रेखा गुप्ता ने संभाली. इसके बाद से आम आदमी पार्टी लगातार यह आरोप लगा रही है कि एक साल के भीतर कई जनहित योजनाओं की रफ्तार धीमी हो गई है. कुछ इलाकों में मोहल्ला क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

क्या है विपक्ष का दावा?

विपक्ष का दावा है कि ट्रैफिक जाम की समस्या फिर गंभीर होती जा रही है और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं दे रही. कई कॉलोनियों में पानी की आपूर्ति और सफाई व्यवस्था को लेकर असंतोष की बातें सामने आई हैं. वहीं सरकार का कहना है कि विकास कार्य जारी हैं और नई योजनाओं पर काम हो रहा है.

सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या पहले की तुलना में अब स्थिति बेहतर है या नहीं. कुछ लोग बिजली बिल और शिक्षा व्यवस्था में पहले मिली राहत को याद कर रहे हैं, तो कुछ वर्तमान सरकार से उम्मीद जता रहे हैं कि वह लंबी अवधि के विकास पर ध्यान दे रही है.

दिल्ली की राजनीति का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जाता है. एक वर्ष किसी भी सरकार के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन का समय माना जाता है, लेकिन राजधानी की जनता की अपेक्षाएं हमेशा ऊंची रहती हैं. फिलहाल बहस जारी है. विपक्ष इसे जनता की नाराजगी बता रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक अभियान कह रही है. अंतिम निर्णय आने वाले समय और जनता की राय पर निर्भर करेगा.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag