‘धुरंधर’ स्टाइल पड़ा महंगा... कांग्रेस नेता के करीबी ने 'FA9LA' गाने पर लहराई पिस्टल, वीडियो वायरल
कलबुर्गी में कांग्रेस विधायक के करीबी मतीन पटेल का हथियार लहराते हुए एक रील वीडियो वायरल हुआ है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि हथियार असली थे या नहीं तथा लाइसेंस नियमों का पालन हुआ था या नहीं.

सोशल मीडिया पर रील बनाना आजकल आम बात है, लेकिन कभी-कभी यही शौक भारी पड़ सकता है. कर्नाटक के कलबुर्गी में एक कांग्रेस नेता के करीबी मतीन पटेल का ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह पिस्टल और बंदूक लहराते नजर आ रहे हैं. वीडियो सामने आते ही पुलिस हरकत में आ गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है.
बताया जा रहा है कि मतीन पटेल ने ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ के लोकप्रिय गाने ‘FA9LA’ पर एक रील बनाई. वीडियो में वह काली एसयूवी से उतरते हैं और दोस्तों के साथ डांस करते दिखाई देते हैं. इसी दौरान उनके हाथ में हथियार भी नजर आते हैं. वीडियो का अंदाज फिल्मी सीन से प्रेरित बताया जा रहा है, जहां एक किरदार का भव्य स्वागत होता है. हालांकि, हथियारों का इस तरह सार्वजनिक प्रदर्शन लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
A display of “gun culture” by a #Congress leader in #Kalaburagi district has now become a major topic of debate.
A Congress leader named Mateen Patel, said to be a close associate of #Afzalpur Assembly constituency MLA #MYPatil, is at the center of the controversy after videos… pic.twitter.com/hFASTKkwuH— Hate Detector 🔍 (@HateDetectors) February 10, 2026
पुलिस ने क्या कहा?
कलबुर्गी के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी ने कहा कि वायरल वीडियो की जानकारी पुलिस को है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वीडियो कहां शूट किया गया और यह किस थाने के क्षेत्र में आता है, इसकी जांच की जाए. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वीडियो में दिखाए गए हथियार असली हैं या नकली. अगर वे असली पाए जाते हैं, तो यह जांच की जाएगी कि क्या उनके पास वैध लाइसेंस है. यदि लाइसेंस है, तो यह भी देखा जाएगा कि कहीं लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं हुआ. अगर हथियार गैरकानूनी पाए गए, तो आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी.
क्या कहता है कानून?
भारत में बिना उचित अनुमति के सार्वजनिक स्थान पर हथियार दिखाना गंभीर अपराध माना जाता है. आयुध अधिनियम, 1959 (Arms Act, 1959) और इससे जुड़े नियम ऐसे मामलों में लागू होते हैं. इन कानूनों का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना और हथियारों के गलत इस्तेमाल को रोकना है.
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले में कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि हथियार लाइसेंस वाले थे या नहीं और वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया. कई बार राज्य सरकारें धारा 144 जैसे आदेश भी लागू करती हैं, जिनके तहत सार्वजनिक जगहों पर हथियार ले जाना या दिखाना पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकता है.


