पहले मुफ्त सफर, फिर जेब पर वार! गंगा एक्सप्रेसवे का पूरा खेल क्या है?

गंगा एक्सप्रेसवे पर शुरुआत के पहले 15 दिन तक यात्रियों से कोई टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा. इसके बाद 1500-1800 रुपये तक टोल देना होगा और फास्टैग वार्षिक पास भी लागू नहीं होगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

उत्तर प्रदेश में बने नए गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर यात्रियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि एक्सप्रेसवे पर वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद शुरुआती 15 दिनों तक किसी भी तरह का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा. 

क्या है 15 दिनों तक टोल फ्री का उद्देश्य? 

इस फैसले का उद्देश्य लोगों को नए एक्सप्रेसवे का अनुभव कराने के साथ-साथ यात्रा को आसान और सुगम बनाना है. सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने परियोजना से जुड़ी कंपनियों आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और अदानी इंफ्रास्ट्रक्चर को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वे 15 दिनों तक टोल वसूली पूरी तरह बंद रखें. साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि इस अवधि के दौरान एक्सप्रेसवे के संचालन और रखरखाव में किसी तरह की लापरवाही न हो और सभी सुरक्षा मानकों का पालन सख्ती से किया जाए.

गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल कितने टोल? 

गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल दो टोल प्लाजा बनाए गए हैं. हालांकि, शुरुआती 15 दिनों तक यात्रा पूरी तरह मुफ्त रहेगी, लेकिन इसके बाद यात्रियों को टोल शुल्क देना होगा. अनुमान के मुताबिक, पूरे मार्ग के लिए टोल करीब 1,500 से 1,800 रुपये के बीच हो सकता है. यह दर दूरी और वाहन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.

एक्सप्रेसवे से जुड़ी एक अहम जानकारी यह भी है कि यहां फास्टैग का वार्षिक पास लागू नहीं होगा. यानी नियमित यात्रियों को भी हर बार टोल शुल्क का भुगतान करना होगा. यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित की गई है, जिसमें DBFOT (डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और ट्रांसफर) ढांचे को अपनाया गया है.

एक्सप्रेसवे का नियंत्रण किसके पास? 

इस व्यवस्था के तहत IRB इंफ्रास्ट्रक्चर और अदानी इंफ्रास्ट्रक्चर को अगले 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है. इसके बाद एक्सप्रेसवे का नियंत्रण सरकार के पास आ जाएगा. गंगा एक्सप्रेसवे को राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गिना जा रहा है, जिससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

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