मैं फ्लाइट पकड़ने की चिंता से अपने कर्तव्य को...इस्तीफे के बाद पहली बार जगदीप धनखड़ ने कार्यक्रम को किया संबोधित
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के लॉन्च कार्यक्रम में भाग लिया. उन्होंने राष्ट्र की संकीर्ण अवधारणा पर चिंता व्यक्त की और संस्थाओं की भूमिका को अहम बताया. धनखड़ ने पुस्तक की वसुधैव कुटंबकम अवधारणा को प्रेरणादायक बताया.

नई दिल्ली : पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के लॉन्चिंग कार्यक्रम में शिरकत की और मंच पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए. इस अवसर पर धनखड़ ने अपने वक्तव्य में बताया कि राष्ट्र की अवधारणा को अत्यधिक संकीर्ण कर दिया गया है और कहा कि संस्थाएं व्यक्तिगत संघर्षों से अधिक प्रभावी रूप से लड़ सकती हैं. उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि वसुधैव कुटंबकम की अवधारणा पर आधारित यह पुस्तक भविष्य निर्माण के लिए प्रेरणादायक है.
फ्लाइट टाइमिंग के बावजूद कर्तव्य से नहीं हटे
#WATCH | Bhopal, Madhya Pradesh | At the launch of the book ‘Hum Aur Yah Vishva,’ written by RSS All India Executive Member Manmohan Vaidya, Former Vice President Jagdeep Dhankar says, "...In today's time, people are drifting away from morality and spirituality. 'Main flight… pic.twitter.com/OWbfcEy0XO
— ANI (@ANI) November 21, 2025
लोग नैरेटिव के जाल में फंसा सकते हैं...
धनखड़ ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि नैरेटिव यानी आख्यानों के चक्कर में कोई फंस न जाए. उन्होंने कहा, "मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं, लेकिन लोग नैरेटिव के जाल में फंसा सकते हैं. व्यक्तिगत रूप से इससे कोई नहीं लड़ सकता, लेकिन संस्थाएं इससे लड़ सकती हैं." उनके इस विचार ने उपस्थित सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि किस तरह से बड़ी संस्थाएं समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति रखती हैं.
'हम और यह विश्व' की प्रेरणादायक अवधारणा
पूर्व उपराष्ट्रपति ने किताब के बारे में कहा कि इस पुस्तक में वसुधैव कुटंबकम (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) की अवधारणा को विशेष रूप से उजागर किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पुस्तक को पढ़ेंगे, वे यह महसूस करेंगे कि हमारा अतीत कितना गौरवशाली था और यह पुस्तक निश्चित रूप से सोए हुए लोगों को जागरूक करेगी. धनखड़ का मानना था कि इस पुस्तक के माध्यम से एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा.
इस्तीफे के बाद पहला सार्वजनिक संबोधन
यह कार्यक्रम जगदीप धनखड़ के लिए खास था क्योंकि यह उनका उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद पहला सार्वजनिक संबोधन था. 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. इस अवसर पर उनके साथ मनमोहन वैद्य, विशिष्ट अतिथि और दैनिक जागरण समूह के कार्यकारी संपादक विष्णु त्रिपाठी तथा पीठाधीश्वर श्रीआनंदम धाम वृंदावन के सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज भी उपस्थित थे.
यह कार्यक्रम न केवल किताब के महत्व को उजागर करने का अवसर था, बल्कि यह जगदीप धनखड़ की विचारधारा और उनके कर्तव्य के प्रति दृढ़ता को भी दर्शाता है. उनके विचारों ने समाज को प्रेरित किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें और समग्र राष्ट्र के लिए काम करें.


