बिहार में PM मोदी को अपशब्द कहने का मामला बना सियासी बवाल, प्रशांत किशोर ने लगाया चुनावी फिक्स मैच का आरोप

बिहार में पीएम मोदी और उनकी मां को गाली देने का मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जिसके चलते प्रशांत किशोर, तेज प्रताप यादव और जीतन राम मांझी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

Simran Sachdeva

Bihar politics: बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां को गाली देने का मामला राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है. राज्य और केंद्र के कई नेताओं ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है. जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इसे चुनावी ‘फिक्स मैच’ बताया जा रहा है. इस विवाद ने सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तीखी बहस छेड़ दी है.

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस मामले को जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की साजिश बताया. वहीं, राजद नेता तेज प्रताप यादव ने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने वाले को पागल तक बता दिया. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी इसे निंदनीय बताया और राजद पर हमला बोला.

प्रशांत किशोर का विवाद पर तंज

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि जिन लोगों ने पीएम मोदी या उनकी मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया, उनके लिए ये चुनाव के दौरान का फिक्स मैच है. ये सब मुद्दों से भटकाने की साजिश है.

उन्होंने आगे कहा कि कोई ये नहीं देख रहा कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली में बिहारी युवाओं को गालियां किस तरह दी जा रही हैं. प्रशांत किशोर ने ये भी कहा कि तेजस्वी की मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी बिहार BJP अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को अपना भाई कहती हैं, जिसे उन्होंने 'जनता को बेवकूफ बनाने' की रणनीति बताया.

तेज प्रताप यादव ने की कड़ी निंदा

पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि जो भी मेरी बहन, मेरी मां या नरेंद्र मोदी की मां के बारे में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करता है, वो पागल हो गया है. उन्होंने इस कृत्य की कड़ी आलोचना की और बिहार सरकार एवं केंद्र से उसकी गिरफ्तारी की मांग की. उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी, जनशक्ति जनता दल और बिहार गठबंधन तब तक विरोध करेगा जब तक उसे जेल नहीं भेज दिया जाता.

जीतन राम मांझी का बयान

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि जो व्यक्ति व्यथित हो जाता है, वो गंदे शब्दों और कृत्यों का सहारा लेता है. राजद ऐसे निंदनीय कृत्यों के जरिए सुर्खियां बटोर रहा है. हमें उम्मीद है कि बिहार के मतदाता उनके कार्यों को ध्यान से देखेंगे और चुनाव में इसका करारा जवाब देंगे.

इस पूरे विवाद ने बिहार की राजनीतिक तस्वीर को और गर्मा दिया है और आगामी चुनावों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.

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