मध्य प्रदेश के मंदसौर में लिंचिंग की घटना, राजस्थान के युवक की गौ तस्कर समझकर पीट-पीटकर हत्या; मामला दर्ज
मंदसौर में गौ तस्करी के शक में 32 वर्षीय आसिफ मुल्तानी की कथित गौरक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी. वे मवेशी खरीदकर लौट रहे थे. एफआईआर में लूट और फिरौती की बात भी सामने आई है. पुलिस ने 5 गिरफ्तारियां की हैं, SIT जांच कर रही है, जबकि कुछ आरोपी अब भी फरार हैं.

Mandsaur lynching: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 32 वर्षीय युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान आसिफ बाबू मुल्तानी के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि यह हमला कथित गौरक्षकों द्वारा उस समय किया गया जब वे उसे गौ तस्कर समझ बैठे.
मवेशी खरीदकर लौटते वक्त हुआ हमला
यह घटना 15 और 16 सितंबर की दरमियानी रात लगभग 3 बजे की है. जानकारी के अनुसार, आसिफ बाबू मुल्तानी अपने चचेरे भाई मोहसिन के साथ राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित लाम्बिया रैला मवेशी बाजार से मवेशी खरीदकर लौट रहे थे. मवेशियों को कृषि और डेयरी कार्यों के लिए खरीदा गया था. दोनों मंदसौर के मुल्तानपुर गांव के निवासी हैं.
एफआईआर में गंभीर आरोप
पीड़ित के भाई मंजू पेमला ने 17 सितंबर को बनेड़ा थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज करवाई. दर्ज एफआईआर के अनुसार, हमला करने वालों ने न केवल आसिफ को बेरहमी से पीटा बल्कि उससे ₹36,000 की नकदी भी छीन ली. आरोप यह भी है कि हमलावरों ने आसिफ का मोबाइल लेकर उसके परिवार से ₹50,000 की फिरौती की मांग की थी, जिससे उसकी जान बचाई जा सके.
अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत
रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में आसिफ के सिर में गंभीर चोटें आईं. उन्हें पहले भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर उसे बचा नहीं सके. आसिफ अपने पीछे पत्नी, ढाई साल की बेटी और आठ महीने के बेटे को छोड़ गया है.
पुलिस कार्रवाई
इस घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ हत्या, गंभीर चोट पहुंचाना, अवैध तरीके से रोकना, फिरौती वसूली और गैरकानूनी जमावड़ा जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. साथ ही एक अलग मामला गौ तस्करी को लेकर भी दर्ज हुआ है.
एसआईटी का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. यह टीम सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है. टीम यह भी देख रही है कि हमला व्यक्तिगत रंजिश, जबरन वसूली या सड़क पर हुई किसी बहस की वजह से तो नहीं हुआ.
अब भी कई आरोपी फरार
पीड़ित के भाई पेमला का कहना है कि एफआईआर में दर्ज कई आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. इससे न केवल पीड़ित परिवार की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि न्याय प्रक्रिया पर भी चिंता जताई जा रही है. पुलिस ने जांच तेज करने और सभी दोषियों को जल्द पकड़ने का भरोसा दिलाया है.


