युवराज मेहता की मौत पर सियासत गरम, नोएडा DM की भूमिका पर सवाल

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर सियासत तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी ने यूपी सरकार के एक्शन को नाकाफी बताते हुए सीधे जिला प्रशासन और रेस्क्यू सिस्टम की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नोएडा: नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और रेस्क्यू सिस्टम की नाकामी का बड़ा सवाल बन चुकी है. इस मामले में यूपी सरकार की कार्रवाई के बाद सियासत भी तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे तौर पर जिला प्रशासन की भूमिका पर उंगली उठाई है.

घटना के बाद नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटाए जाने को लेकर AAP नेता और दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इसे केवल औपचारिक कार्रवाई करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि असली जिम्मेदार अधिकारियों को बचाया जा रहा है और पूरे सिस्टम में जवाबदेही की भारी कमी है.

युवराज मेहता केस पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने नोएडा प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आईएएस अधिकारियों का ट्रांसफर कोई सख्त कदम नहीं माना जा सकता. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि असली जिम्मेदारी तय करने के बजाय केवल पदों में फेरबदल किया जा रहा है.

उन्होंने साफ तौर पर कहा,"नोएडा की DM मेधा रूपम ही असल में SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन की जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है."

'राजनीतिक संरक्षण में दबाई जा रही जिम्मेदारी'

सौरभ भारद्वाज ने एक अन्य पोस्ट में और भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा,"नोएडा की DM, जिनके अंडर रेस्क्यू ऑपरेशन और SDRF आते हैं, ECI ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं. ऐसे में आप सोच सकते हैं कि भ्रष्ट IAS अधिकारियों पर केस चलाना कितना मुश्किल है. दोषी ठहराना तो दूर, पूरा सिस्टम ही खराब है."

AAP का आरोप है कि राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के चलते जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही.

सीएम योगी का एक्शन

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. 19 जनवरी को नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को पद से हटाकर वेटलिस्ट पर डाल दिया गया. इसके साथ ही उन्हें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के MD पद से भी हटा दिया गया.

सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की है, जिसे पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है और ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं.

कैसे हुई युवराज मेहता की मौत?

16-17 जनवरी की रात युवराज मेहता अपने गुरुग्राम स्थित ऑफिस से नोएडा सेक्टर-150 स्थित घर लौट रहे थे. घने कोहरे और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार अनियंत्रित होकर निर्माणाधीन स्थल की टूटी बाउंड्री वॉल से टकराई और 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई.

जान बचाने के लिए युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए, जहां वे करीब 90 से 120 मिनट तक फंसे रहे. इस दौरान उन्होंने अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई और मोबाइल की टॉर्च जलाकर इशारे करते रहे, कहते रहे, "पापा, मुझे बचा लो."

आरोप है कि मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद होने के बावजूद किसी ने उन्हें समय रहते बचाने की कोशिश नहीं की.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सिस्टम पर सवाल

युवराज मेहता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह एस्फिक्सिया यानी दम घुटना और कार्डियक अरेस्ट बताई गई है. इस घटना ने नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

निर्माणाधीन इलाके में सुरक्षा इंतजामों की कमी और रेस्क्यू टीम की निष्क्रियता को सिस्टम की बड़ी विफलता माना जा रहा है, जहां मौजूदगी के बावजूद एक युवक की जान नहीं बचाई जा सकी.

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