BMC में शिंदे का जादू, NCP के दोनों गुटों के पार्षदों ने शिवसेना से मिलाया हाथ

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों से जुड़े चार नवनिर्वाचित नगरसेवकों ने शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है. इनमें एनसीपी के अजित पवार गुट के तीन नगरसेवक और शरद पवार गुट का एक नगरसेवक शामिल है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मुंबई की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. ताजा राजनीतिक घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों से जुड़े चार नवनिर्वाचित नगरसेवकों ने शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है, जिससे बीएमसी की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं.

एनसीपी से चार नगरसेवक शिंदे गुट में शामिल  

सूत्रों के मुताबिक, इनमें एनसीपी के अजित पवार गुट के तीन नगरसेवक और शरद पवार गुट का एक नगरसेवक शामिल है. इन सभी ने औपचारिक रूप से शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है. इसके साथ ही बीएमसी में शिवसेना (शिंदे) के नेतृत्व में एक संयुक्त विधायी समूह का गठन किया गया है, जिसमें एनसीपी के अजित पवार गुट और शरद पवार गुट से आए एक-एक नगरसेवक को भी शामिल किया गया है.

मंगलवार को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति बीएमसी में अपने-अपने समूहों का आधिकारिक पंजीकरण कराने जा रही है. इस प्रक्रिया के तहत भारतीय जनता पार्टी बीएमसी में एक स्वतंत्र समूह के रूप में पंजीकृत होगी, जबकि शिवसेना (शिंदे) एनसीपी (अजित पवार गुट) और शरद पवार गुट से जुड़े नगरसेवकों के साथ मिलकर संयुक्त समूह के रूप में खुद को दर्ज कराएगी. इस कदम को बीएमसी में सत्ता संतुलन और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

शिंदे गुट को फायदा 

इस राजनीतिक पुनर्गठन का सीधा फायदा शिंदे गुट को मिला है. शिवसेना (शिंदे) की संख्या बीएमसी में 29 से बढ़कर अब 33 नगरसेवकों तक पहुंच गई है. इसके साथ ही बीएमसी में महायुति की कुल संख्या बढ़कर 122 हो गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह रणनीति आने वाले समय में नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और संगठनात्मक नियुक्तियों को ध्यान में रखकर अपनाई गई है.

हालिया बीएमसी चुनावों में मुंबई का जनादेश महायुति के पक्ष में ऐतिहासिक रहा है. करीब तीन दशकों तक नगर निगम की राजनीति पर ठाकरे परिवार का वर्चस्व रहा, लेकिन इस बार यह सिलसिला टूट गया. भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने कुल 118 सीटों पर जीत दर्ज कर मजबूत बढ़त बनाई, जिसमें भाजपा अकेले 90 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. वहीं, शिवसेना (शिंदे) ने 29 सीटें हासिल कीं.

दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए यह चुनाव झटका साबित हुआ. पार्टी को केवल 65 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि 2017 के चुनाव में वह 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी. आठ वर्षों में 19 सीटों की गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि मुंबई की राजनीति में सत्ता समीकरण तेजी से बदल रहे हैं.

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