भाषाई टकराव का वीडियो वायरल, मराठी पर हिंदी भाषी की चुनौती

हाल ही में पनवेल से एक वीडियो सामने आया है, जिसने इस विवाद को फिर ताजा कर दिया है. वायरल वीडियो में मराठी में बातचीत करने का दबाव बनाए जाने और हिंदी बोलने पर आपत्ति जताने का मामला दिखता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

Language dispute: महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से भाषा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. मराठी बनाम हिंदी का मुद्दा बार-बार सुर्खियों में आ रहा है. पहले स्कूलों में त्रिभाषा नीति लागू करने को लेकर देवेंद्र फडणवीस सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा था. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने उस नीति को मराठी भाषा के खिलाफ साजिश बताते हुए मोर्चा खोला था. विरोध बढ़ने पर सरकार ने निर्णय वापस ले लिया, लेकिन समाज में भाषा आधारित तनाव अब भी देखने को मिल रहा है.

पनवेल से सामने आया वीडियो 

इसी कड़ी में हाल ही में पनवेल से एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने इस विवाद को फिर ताजा कर दिया है. वायरल वीडियो में मराठी में बातचीत करने का दबाव बनाए जाने और हिंदी बोलने पर आपत्ति जताने का मामला दिखता है. वीडियो के अनुसार, गणेश उत्सव के दौरान ट्रैवल व्लॉगर विजय चंदेल और एक महिला के बीच तीखी बहस हो गई.

वीडियो में महिला विजय चंदेल से कहती है कि मराठी में बात करो. इस पर विजय जवाब देते हैं कि मैं हिंदी बोलता हूं और हिंदी में ही बात करूंगा. महिला और उसके साथ मौजूद व्यक्ति इस पर जोर देते हैं कि महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी बोलनी होगी. बहस बढ़ने पर महिला ने यहां तक कह दिया कि पुलिस आएगी तो तब बताना.

अपने रुख पर अडिग रहे चंदेल 

हालांकि, विजय चंदेल अपने रुख पर अडिग रहे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे महाराष्ट्र और यहां की संस्कृति का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें मराठी बोलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. विजय ने कहा कि हिंदी भारत की भाषा है और मैं हिंदी में ही बातचीत करूंगा. मैं मराठी बोलता नहीं हूं और बोलूंगा भी नहीं. मरते दम तक हिंदी में ही बात करूंगा.

इस पूरे विवाद के बाद दोनों परिवारों ने पुलिस या मीडिया से कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया. बताया जा रहा है कि आपसी बातचीत के बाद मामला शांत कर लिया गया. लेकिन वीडियो के सोशल मीडिया पर फैलते ही यह बहस एक बार फिर जनचर्चा का विषय बन गई है.

तनाव और विभाजन की स्थिति 

भाषा को लेकर ऐसे टकराव समाज में तनाव और विभाजन की स्थिति पैदा कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति पर किसी खास भाषा को थोपना भी उचित नहीं है. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषाई विविधता को टकराव का कारण बनाया जाना चाहिए या इसे आपसी सहयोग और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखा जाना चाहिए.

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