जम्मू-कश्मीर में आया 4.8 तीव्रता का भूकंप, डरकर घरों से बाहर भागे लोग
जम्मू-कश्मीर में सोमवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. भूकंप सुबह 5.35 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.8 थी. भूकंप का केंद्र बुडगाम जिले में 33.9°N और 74.76°E अक्षांशों पर स्थित था.

नई दिल्ली: भारत के अलग-अलग राज्यों में बीते कुछ समय के भीतर कई बार भूकंप की घटनाएं दर्ज की गई. सोमवार सुबह जम्मू और कश्मीर में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे इलाके में दहशत फैल गई और लोग डरकर अपने घरों से बाहर भागने लगे. जानकारी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.8 थी.
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) द्वारा दिए गए प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, भूकंप सुबह 5.35 बजे आया था, जिसका केंद्र बुडगाम जिले में 33.9°N और 74.76°E अक्षांशों पर स्थित था. वहीं, भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई है. सुबह-सुबह आए इस भूकंप में अब तक जान-माल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है.
आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किए गए झटके
केंद्र के आसपास के क्षेत्रों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. इन क्षेत्रों में बुडगाम जिले से मात्र 4 किलोमीटर दूर स्थित चरार-ए-शरीफ, 13 किलोमीटर दूर स्थित पुलवामा और 21 किलोमीटर दूर स्थित श्रीनगर, शोपियां शामिल हैं. जम्मू-कश्मीर में इस समय लोगों को भीषण ठंड का कहर देखना पड़ रहा है. इसके साथ ही कई जगाहों पर भारी बर्फबारी भी हो रही है. ऐसे में भूकंप के झटकों ने घाटी के लोगों में और अधिक दहशत पैदा कर दी है.
तीव्रता मध्यम, लेकिन दहशत फैलाने के लिए पर्याप्त
विशेषज्ञों का कहना है कि झटकों की तीव्रता मध्यम थी, हालांकि इस तीव्रता के झटके अक्सर निंद से उठाने, दहशत फैलाने और इमारतों को मामूली क्षति पहुंचाने के लिए काफी होती है, खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों में. वहीं, जानकारी के अनुसार, भूकंप के समय बुडगाम जिले के आस-पास के ईलाके का तापमान बेहद कम ( लगभग -0.9 डिग्री सेल्सियस) था.
अंडमान और निकोबार में भी आया भूकंप
नेशनल सेंटर ऑफ सिस्मोलॉजी के अनुसार, सोमवार 2 फरवरी 2026 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. भूकंप सुबह 3:31 बजे आया और रिक्टर स्केल पर इनकी तीव्रता 4.6 मापी गई. जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र निकोबार क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर था.
क्यों आते हैं भूकंप?
पृथ्वी में 7 टेक्टोनिक प्लेटें होती हैं, जिनकी गति के कारण भूकंप आते हैं. ये टेक्टोनिक प्लेट्स अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार खिसकती रहती हैं. खिसकते हुए ये टेक्टोनिक प्लेटें फॉल्ट लाइन पर टकराती हैं, जिसके कारण घर्षण पैदा होता जिससे ऊर्जा निकलती है. यह ऊर्जा जब बाहर निकलती है, तो सतह पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती है.


