एडोबी में नेतृत्व बदलने की तैयारी, CEO शांतनु नारायण ने 18 साल बाद छोड़ा पद
एडोबी के सीईओ शांतनु नारायण ने पद छोड़ने का फैसला किया है. 2007 से कंपनी का नेतृत्व कर रहे नारायण नए उत्तराधिकारी के चयन तक जिम्मेदारी निभाते रहेंगे. उनके फैसले के बाद माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नडेला ने उनकी उपलब्धियों की सराहना की.

नई दिल्ली: दुनिया की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में शामिल एडोबी में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करीब दो दशक तक कंपनी का नेतृत्व करने वाले सीईओ शांतनु नारायण ने पद छोड़ने का फैसला किया है. उनकी विदाई की खबर ऐसे समय सामने आई है जब टेक उद्योग तेजी से बदल रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच एडोबी की भविष्य की दिशा पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं. इस घोषणा के बाद माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया.
सत्या नडेला ने शांतनु नारायण को टेक उद्योग का दिग्गज बताते हुए एडोबी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए उनकी प्रशंसा की. नडेला ने अपने संदेश में कहा कि शांतनु नारायण ने एडोबी को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक बनाने में अहम भूमिका निभाई. उनके नेतृत्व में कंपनी ने रचनाकारों, उद्यमियों और ब्रांडों के लिए नए अवसर पैदा किए. उन्होंने यह भी कहा कि नारायण सिर्फ एक सहकर्मी ही नहीं बल्कि उनके लिए एक मार्गदर्शक भी रहे हैं. नडेला ने उनके साथ बिताए समय और टेक उद्योग के लिए उनके योगदान को याद करते हुए आभार व्यक्त किया.
आखिर क्यों पद छोड़ रहे हैं शांतनु नारायण
हालांकि शांतनु नारायण ने पद छोड़ने का फैसला किया है, लेकिन नए सीईओ की नियुक्ति होने तक वे कंपनी का नेतृत्व करते रहेंगे. इसके साथ ही वे एडोबी के बोर्ड के चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी भी निभाते रहेंगे. टेक उद्योग में तेजी से बढ़ते एआई के प्रभाव के कारण एडोबी की रणनीति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. हाल के वर्षों में एआई आधारित इमेज जनरेशन टूल्स तेजी से लोकप्रिय हुए हैं. गूगल जैसे टेक दिग्गजों के नए एआई टूल्स की वजह से कई ऐसे काम आसान हो गए हैं जिनके लिए पहले फोटोशॉप जैसे एडोबी के सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती थी. इसी कारण निवेशक यह जानना चाहते हैं कि बदलते तकनीकी माहौल में एडोबी अपनी स्थिति कैसे मजबूत बनाए रखेगी.
एआई के साथ नई दिशा की तैयारी
एडोबी भी इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपने एआई प्रोडक्ट्स पर तेजी से काम कर रही है. कंपनी का फायरफ्लाई नाम का एआई प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कंपनी के अनुसार, एआई आधारित सेवाओं से होने वाली आय पिछले साल के मुकाबले तीन गुना से अधिक बढ़ी है. कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में शांतनु नारायण ने कहा कि यह विदाई का क्षण नहीं बल्कि आत्मचिंतन का समय है. उन्होंने यह भी कहा कि रचनात्मकता का अगला दौर एआई, नए कार्यप्रवाह और अभिव्यक्ति के नए तरीकों से आकार लेगा.
एडोबी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया
शांतनु नारायण का कार्यकाल एडोबी के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जब उन्होंने कंपनी का नेतृत्व संभाला था, तब कंपनी में करीब 3,000 कर्मचारी थे. आज यह संख्या बढ़कर 30,000 से ज्यादा हो चुकी है. इसी तरह कंपनी की वार्षिक आय भी एक अरब डॉलर से कम से बढ़कर 25 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई. उनके नेतृत्व में एडोबी का क्रिएटिव सॉफ्टवेयर सूट दुनिया भर के डिजाइनरों और कंटेंट क्रिएटर्स की पहली पसंद बन गया. फोटोशॉप और प्रीमियर प्रो जैसे सॉफ्टवेयर आज क्रिएटिव इंडस्ट्री के मानक माने जाते हैं.
लंबा और सफल करियर
शांतनु नारायण ने 1998 में एडोबी में उपाध्यक्ष और इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी समूह के महाप्रबंधक के रूप में काम शुरू किया था. बाद में 2005 में उन्हें कंपनी का अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी बनाया गया. दो साल बाद 2007 में उन्होंने सीईओ की जिम्मेदारी संभाली और 2017 में वे बोर्ड के चेयरमैन भी बने. एडोबी से पहले वे एप्पल और सिलिकॉन ग्राफिक्स जैसी कंपनियों में उत्पाद विकास से जुड़े पदों पर काम कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने फोटो शेयरिंग स्टार्टअप पिकट्रा की सह-स्थापना भी की थी.
नारायण के नाम पांच पेटेंट दर्ज हैं. उन्होंने अमेरिका के बॉलिंग ग्रीन स्टेट यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से एमबीए किया है. वहीं भारत के उस्मानिया विश्वविद्यालय से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी. करीब दो दशकों तक एडोबी का नेतृत्व करने के बाद अब शांतनु नारायण एक नई भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि टेक दुनिया की नजर इस बात पर है कि एआई के दौर में कंपनी का अगला कदम क्या होगा.


