2026 में रहेगा AI का दबदबा! भारत की जीडीपी के बराबर खर्च करेंगी ये चार कंपनियां

भारत का 2026-27 बजट करीब 630-670 अरब डॉलर है, जो पूरे देश के लिए खर्च होगा. लेकिन अमेजन, गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट 2026 में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल 650 अरब डॉलर खर्च करने वाली हैं. यह राशि भारत के बजट से ज्यादा है, जबकि ये कंपनियां छंटनियां भी कर रही हैं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत सरकार ने 1 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना वार्षिक बजट पेश किया, जिसमें पूरे देश के लिए कुल व्यय लगभग 630-670 अरब डॉलर (करीब 53.5 लाख करोड़ रुपये) अनुमानित है. यह राशि रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सब्सिडी, बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी योजनाओं जैसे दर्जनों क्षेत्रों में 140 करोड़ से अधिक लोगों के लिए खर्च होगी. लेकिन तकनीकी दुनिया में एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है.

एक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ चार बड़ी अमेरिकी कंपनियां अमेजन, गूगल (अल्फाबेट), मेटा और माइक्रोसॉफ्ट 2026 में एआई और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल मिलाकर करीब 650 अरब डॉलर खर्च करने वाली हैं. यानी भारत सरकार के पूरे साल के बजट के बराबर या उससे ज्यादा रकम सिर्फ एआई पर!

कंपनियों के खर्च के आंकड़े

ये अनुमान कंपनी के हालिया घोषणाओं पर आधारित हैं. अमेजन ने सबसे बड़ा प्लान बताया—2026 में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) करीब 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो मुख्य रूप से एडब्ल्यूएस क्लाउड पर एआई क्षमता बढ़ाने के लिए है. अल्फाबेट (गूगल) ने 175-185 अरब डॉलर का अनुमान लगाया, जिसमें क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख हैं.

मेटा ने 115-135 अरब डॉलर के बीच खर्च की बात कही, जबकि माइक्रोसॉफ्ट का अनुमानित कैपेक्स 120 अरब डॉलर के आसपास है. ये चारों कंपनियां डेटा सेंटर, हाई-एंड सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण, विशेष एआई चिप्स और जनरेटर जैसी चीजों पर भारी निवेश कर रही हैं, जो चैटबॉट से लेकर एंटरप्राइज टूल्स तक सब चलाते हैं.

एआई रेस का पैमाना

पिछले सालों में भी ये कंपनियां खर्च बढ़ा रही थीं, लेकिन 2026 के आंकड़े अभूतपूर्व हैं. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह खर्च इस सदी का सबसे बड़ा कैपेक्स बूम है. अमेजन सीईओ एंडी जेसी ने हाल ही में कहा कि वे आक्रामक निवेश करेंगे क्योंकि एआई ग्राहक अनुभव को पूरी तरह बदल देगा. उनका मानना है कि जो कंपनी एआई में आगे रहेगी, वही लंबे समय तक बाजार पर राज करेगी. ये खर्च कई विकसित देशों के जीडीपी से ज्यादा हैं, जैसे स्वीडन का 2025 जीडीपी करीब 620 अरब डॉलर था.

कर्मचारियों के लिए चिंता की बात

दिलचस्प बात यह है कि ये कंपनियां एआई पर अरबों खर्च कर रही हैं, लेकिन साथ ही बड़े पैमाने पर छंटनियां भी कर रही हैं. अमेजन ने हाल ही में 16,000 कर्मचारियों की छंटनी की और पिछले महीनों में कुल 30,000 से ज्यादा लोगों को निकाला. माइक्रोसॉफ्ट, मेटा जैसी कंपनियां भी इसी राह पर हैं. कंपनियां कहती हैं कि वे रणनीतिक क्षेत्रों (एआई) में निवेश बढ़ा रही हैं, जबकि लागत कम करने के लिए स्टाफ घटा रही हैं. विश्लेषकों का कहना है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से मानव संसाधनों को कम प्राथमिकता मिल सकती है. जीपीयू और सर्वर इंसानों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो रहे हैं.
 

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