आज सूरज उगलेगा आग, भारत के आसमान में दिखने वाला है प्रकृति का सबसे अनोखा नजारा
सूर्य की सतह पर लगातार हो रहे विस्फोटों और सौर ज्वालाओं के बाद अब एक बेहद घना और शक्तिशाली चुंबकीय तूफान सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है.

नई दिल्ली: अंतरिक्ष में पिछले कुछ दिनों से जारी हलचल अब एक बड़ा रूप ले चुकी है. सूर्य की सतह पर लगातार हो रहे विस्फोटों और सौर ज्वालाओं के बाद अब एक बेहद घना और शक्तिशाली चुंबकीय तूफान सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है. अमेरिकी एजेंसी 'स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर' ने सोमवार, 8 जून 2026 के लिए 'G3 श्रेणी' के एक मजबूत भू-चुंबकीय तूफान की गंभीर चेतावनी जारी की है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार खतरा इसलिए बड़ा है क्योंकि सूर्य से निकलने वाली गैसों का एक विशाल और भारी 'फिलामेंट' सीधे हमारे ग्रह के रास्ते में है.
क्या है पूरा मामला?
बीती 6 जून 2026 की सुबह, सूर्य के एक बेहद सक्रिय हिस्से जिसे वैज्ञानिकों ने 'एक्टिव रीजन 4461' नाम दिया है. उसमे एक जोरदार धमाका हुआ. इस धमाके को सौर पैमाने पर 'M1.8' श्रेणी की सौर ज्वाला के रूप में दर्ज किया गया. वैसे तो यह मध्यम स्तर का विस्फोट था. लेकिन इसके साथ सूर्य की आंतरिक परत से निकला एक कोर फिलामेंट अंतरिक्ष में तैरने लगा.
अनोखा नजारा
आमतौर पर ऐसी सौर हवाएं पृथ्वी के पास से बिना छुए गुजर जाती हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. यह चुंबकीय फिलामेंट इस समय लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की तूफानी रफ्तार से सौर मंडल के आंतरिक हिस्से को पार कर रहा है और आज यानी सोमवार रात को इसके पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने की पूरी संभावना है.
So I think my footage from last night has gone kinda viral 😆
— Matt Robinson (@Astromackem) November 23, 2020
So many questions, here are a few answers...
It was taken at the Aurora Borealis Observatory on Senja in northern Norway.
It was taken on a @SonyAlpha 7sii, which is an amazing camera for astrovideography 😍 pic.twitter.com/D7Z30sO4AP
Incredible aurora timelapse filmed in Fort Yukon, Alaska.
— Wonder of Science (@wonderofscience) December 28, 2023
📽: Vincent Ledvinapic.twitter.com/hSRFSJJ0wL
Northern lights. pic.twitter.com/pnFq7eXpq6
— Aesthetics (@aestheticspost_) April 9, 2026
Just when everyone thinks the recent set of solar storm fizzles were all we were going to have this week, WHAM! Region 4461 fires a massive blast and launches a fast moving solar storm towards Earth. Looking closely at the region just before the eruption, a very dense core… pic.twitter.com/DQjOWZANVG
— Dr. Tamitha Skov (@TamithaSkov) June 7, 2026
An aurora lighting up the night sky over Zhongshan Station in Antarctica captured with a spectacular timelapse.pic.twitter.com/LX5j1nYfCI
— Wonder of Science (@wonderofscience) March 16, 2023
क्या होता है सूर्य का 'फिलामेंट' और यह क्यों है खास?
सूर्य का फिलामेंट बिजली और गैस से बना एक ऐसा पुल है. जो सूर्य के बाहरी वायुमंडल में अदृश्य चुंबकीय रेखाओं के सहारे टिका रहता है. इस पुल के अंदर आयनित गैस यानी 'प्लाज्मा' बहता है.
खौफनाक तापमान
हैरानी की बात यह है कि सूर्य का कोरोना जहां 10 से 20 लाख डिग्री सेल्सियस के खौफनाक तापमान पर उबलता है. वहीं इस फिलामेंट के अंदर का तापमान सिर्फ 5,000 से 10,000 डिग्री सेल्सियस होता है. सौर विज्ञान के लिहाज से इसे बहुत 'ठंडा' और बेहद भारी माना जाता है.
सूर्य का चुंबकीय पिंजरा
जब सूर्य का चुंबकीय पिंजरा कमजोर पड़ता है. तो यह भारी फिलामेंट खुलकर सीधे अंतरिक्ष में फेंक दिया जाता है. चूंकि यह बहुत घना होता है इसलिए यह अंतरिक्ष में ज्यादा तेजी से सफर करता है और जब किसी ग्रह से टकराता है तो वहां के चुंबकीय क्षेत्र को बुरी तरह झकझोर देता है.
वैज्ञानिकों की नजर और 'S-शेप' का रहस्य
मशहूर अंतरिक्ष मौसम वैज्ञानिक डॉ. तमिता स्कोव ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर इसे एक 'टेक्स्टबुक कोर फिलामेंट इरप्शन' बताया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस एक्टिव रीजन की चुंबकीय बनावट अंग्रेजी के 'S' अक्षर जैसी थी. ठीक वैसे ही जैसे किसी स्प्रिंग या रबर बैंड को उसकी क्षमता से ज्यादा मरोड़ दिया जाए. 6 जून को ठीक ऐसा ही हुआ. जब खिंचाव बर्दाश्त से बाहर हो गया तो चुंबकीय रेखाएं आपस में टकराकर टूट गई और सारी थमी हुई ऊर्जा एक झटके में बाहर आ गई.
पृथ्वी पर क्या होगा इसका असर?
SWPC द्वारा जारी G3 स्तर की चेतावनी का मतलब है कि आज रात दुनिया के कई हिस्सों, विशेषकर ध्रुवीय और उच्च-अक्षांश वाले क्षेत्रों में आसमान रंग-बिरंगी लाइटों से नहा उठेगा. जिसे हम 'ऑरोरा' या उत्तरी-दक्षिणी रोशनी कहते हैं, वह आज रात बेहद चमकीली और खूबसूरत दिखाई देगी. इसके साथ ही बिजली ग्रिडों में मामूली उतार-चढ़ाव और सैटेलाइट नेविगेशन व रेडियो तरंगों में कुछ समय के लिए रुकावट आने की आशंका भी बनी हुई है.


