नई दिल्ली: कई हफ्तों तक चले जोरदार चुनाव प्रचार के बाद आज पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है. सुबह 7 बजे से शुरू हुए इस मतदान में दोनों राज्यों में मतदाताओं का उत्साह साफ नजर आ रहा है, जहां शुरुआती घंटों में ही कई बूथों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं.
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 294 में से 152 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही दिन में मतदान हो रहा है. दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, जिससे भारी मतदान की उम्मीद जताई जा रही है.
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी जहां अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आक्रामक चुनाव प्रचार किया है.
भाजपा ने राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, भ्रष्टाचार के आरोप, बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ और शासन से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का केंद्र बनाया है.
राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी सियासत गरमाई हुई है. टीएमसी ने भाजपा पर भारतीय चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है और इस मुद्दे को अदालत तक पहुंचाया है.
बताया जा रहा है कि मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जबकि करीब 62 लाख मतदाताओं की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जिससे यह मुद्दा चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन गया है.
टीएमसी अपने चुनाव अभियान में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं को प्रमुखता दे रही है. इसके साथ ही पार्टी ने बंगाली पहचान को भी चुनावी मुद्दा बनाया है और खुद को राज्य की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षक बताने की कोशिश की है.
दोनों प्रमुख दलों ने महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए खास रणनीति अपनाई है. भाजपा ने महिलाओं को 3,000 रुपये मासिक भत्ता देने का वादा किया है, जो टीएमसी द्वारा दिए जा रहे 2,000 रुपये से अधिक है.
राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या 3.76 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है.
इस चुनाव में वाम मोर्चा भी अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटा है. 252 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए वाम दल खासतौर पर उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं.
कूच बिहार, अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग और जलपाईगुड़ी जैसे जिलों में चाय बागान क्षेत्रों और युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति अपनाई जा रही है.
नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए मैदान में हैं, जहां उन्होंने 2021 में ममता बनर्जी को हराया था.
बरहामपुर में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी लंबे समय बाद विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं, जबकि मथाभंगा में भाजपा के निशिथ प्रमाणिक पार्टी की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.
तमिलनाडु में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. सत्ताधारी डीएमके, एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन और अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है.
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके इस चुनाव को अपने शासन और कल्याणकारी योजनाओं पर जनमत संग्रह के रूप में पेश कर रही है.
एआईएडीएमके, आंतरिक चुनौतियों और राजनीतिक बदलावों के बाद वापसी की कोशिश कर रही है. वहीं, विजय की टीवीके ने खासतौर पर युवा और शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाई है और खुद को पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया है.
कोलाथुर से एम.के. स्टालिन एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं, जबकि चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी से उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन चुनाव लड़ रहे हैं.
विजय तिरुचिरापल्ली पूर्व और पेरम्बूर सीटों से पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी अपने गृह क्षेत्र एडप्पाडी से मैदान में हैं.
ओ. पन्नीरसेल्वम, जिन्होंने चुनाव से ठीक पहले एआईएडीएमके छोड़कर डीएमके का दामन थामा, बोदिनायक्कनूर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. First Updated : Thursday, 23 April 2026